प्रश्नोत्तर P3-0110 · भाग 3
गुरु जी, छूटने के लिए तो समझना पड़ेगा?
छूटने के लिए समझना पड़ेगा, और समझने के लिए छूटना पड़ेगा — यही तो बात है, यही तो रहस्य है। तुम एक जगह खड़ा होना चाहते हो — क्यों? जहां खड़े हो रहे हो वह बदल जा रहा है, जिसके द्वारा खड़े हो रहे हो वह बदल रहा है; समझने वाला भी बदल रहा है, समझाने वाला भी; हर वक्त आपकी समझ बदल रही है; हर क्षण, हर पल आप बदल रहे हो, आपका शरीर बदल रहा है, जहां खड़े हो वहां सब बदल रहा है। तो आप क्यों एक जगह खड़ा होना चाहते हो? सब परिवर्तन हो रहा है — बस बात खत्म।
जिंदगी को हंसकर जियो, खुलकर जियो और अभी जियो। आप कहोगे कुछ करना चाहता हूं तो लोग आपसे बात करेंगे; लेकिन जब कहोगे मुझे कुछ नहीं करना है, तो बात ही खत्म — दूसरा बोल ही नहीं पाएगा। अगर आप पक्का डटे हो तो दूसरा जन्म ही नहीं ले पाएगा; दूसरा तब जन्म लेता है जब तुम कुछ करते हो, तब वह बताता है ऐसे नहीं ऐसे करो। तो दूसरे को पैदा मत होने दो — 'अदर इज हेल', दूसरे का अर्थ ही नर्क है; दूसरा जरूरत में ही पैदा होता है।
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