आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0127 · भाग 3

(लाइव) गुरुदेव, मैंने आत्मज्ञान की स्थिति को आज ऐसे समझा — जैसे कोई व्यक्ति बहुत समय से किसी नशे का आदी हो, और जब वह छोड़ देता है तो फिर उसे कुछ फर्क नहीं पड़ता। क्या यह सत्य है, या इससे भी अधिक कुछ है?

आत्मज्ञान को 'कुछ चाहिए' में नहीं समझा जा सकता। जैसे एक कुंवारी लड़की मां बनने के बारे में कितना भी पढ़ ले, डॉक्टर हो जाए, लेकिन वह ममत्व को — कितना भी बोले — उसे एक अधूरापन रहेगा; वह मां बनने के बाद ही उस फीलिंग को जानेगी।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01