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प्रश्नोत्तर P3-0129 · भाग 3

एक धारणा है जिसका आप जवाब दें — सद्गुरु या गुरु कर लिया तो हमारी पाप की गठरी सब सद्गुरु धो देगा, उठा लेगा। क्या यह समझ सही है?

नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं। आपके कर्मों का परिणाम आपको ही भोगना पड़ेगा, और कोई नहीं। जैसे राम का जन्म दशरथ से हुआ; दशरथ ने बाण मारा, श्रवण मर गए, उनके पिता ने श्राप दिया कि जैसे मैं पुत्र के वियोग में मर रहा हूं वैसे तुम भी मरोगे — राम अपने पिता को नहीं बचा पाए, पुत्र वियोग में ही प्राण गए। कृष्ण भगवान के सामने अभिमन्यु मारा गया, उनका भांजा था, कुछ नहीं कर पाए। अपने कर्मों का हिसाब-किताब आपको ही करना पड़ेगा; कोई कुछ नहीं कर सकता। सद्गुरु बस धोने का तरीका बता सकता है, धो नहीं सकता; और आगे होने वाले पाप कर्म बंद हो सकते हैं। धोने का तरीका क्या है? ईमानदारी, सत्कर्म — बस यही मेन है, और सबसे तेज यही है, क्योंकि जरूरतमंद अंतरात्मा से आपको आशीर्वाद देता है। जब किसी की जरूरत पर आप काम आते हो, आप उसके लिए भगवान होते हो। अगर ईमानदारी-सत्कर्म जीवन में अपना लिए तो पहुंच भी सकते हो — आगे का बनेगा नहीं, पिछला खत्म होगा। पापी भी कहीं न कहीं सत्कर्म कर ही देता है — कितना भी दुष्ट हो, कोई पता पूछे तो बता ही देता है।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01