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प्रश्नोत्तर P3-0180 · भाग 3

(कुटिया में साधक) जैसे आप हमारे साथ बोलते हो, वैसे प्रभु या भगवान — अगर कोई होगा — तो मुझसे ऐसे ही बोलेगा ना, तभी तो होगा? क्या वह देहधारी बनकर मुझसे बोलेगा? वैसे तो हर प्राणी में, अलग-अलग रूप में वह हमारी मदद करता ही है, किसी ना किसी के रूप में मिल जाता है — जानवर में, गुरु में, मां में।

हां, मेरे से बात करेगा तभी तो होगा। अगर मेरे से बात नहीं कर रहा है, मैं उसे महसूस नहीं कर पा रहा हूं, तो मेरे लिए थोड़ी ना है वो। मेरे लिए तो तब होगा जब वो मुझसे बात करेगा। बात करने का तरीका अलग होगा, बैठने का हो सकता है तरीका अलग हो, लेकिन होगा तो मुझसे बोलेगा तभी तो होगा। अगर मुझसे बातचीत नहीं हुई तो उसके होने से क्या होगा — मेरा कोई मतलब ही नहीं, तो मेरे लिए तो नहीं है ना। अगर वो किसी के लिए है भी, लेकिन मुझसे नहीं मिला, तो फिर वो उसके लिए है, मेरे लिए थोड़ी ना है, और उससे (मेरा) कुछ होगा भी नहीं। देहधारी क्यों? मैंने एक ही बात कहा — अपना तरीका छोड़ो। वो कैसे बोलेगा, वो देखेगा ना। आप क्यों तय कर रहे हो कि देह लेके बोले? आप उसे बंधन में क्यों बांधना चाहते हो? यही तो हमारी कमी है; हमारे अंदर एक ही कमी है कि हम किसी को बंधन में लाना चाहते हैं। जब प्रह्लाद से हिरण्यकश्यप ने पूछा — तेरा भगवान कहां है? बोले — हर जगह विराजमान है। तो बोले — क्या इस खंबे में है? उसने रूप की कल्पना थोड़ी ना की थी। आप रूप की कल्पना मत करिए, बस मिलने की कल्पना करिए। मिलने की इच्छा रखिए, और उससे मिलने के लिए किस स्थिति पर आना है, उस स्थिति पर आने के लिए काम करिए। कौन उससे मिल सकता है, किस स्थिति में मिला जा सकता है — उस स्थिति में आने के लिए काम करिए। जब आप उस स्थिति में आ जाओगे तो वो आपसे मिल लेगा। लेकिन आप यह कामना मत करो कि वो किस देह को ले आए — यह भी एक इच्छा है। मैं वही तो कह रहा हूं — अगर आप देखो तो इस दुनिया में जो भी उस लायक हुए, उसे मिला। तो आपको तो मिलना है, तो आप देखिए कि क्या आप मिलने लायक हो। आप यह देखिए, क्योंकि वह किससे मिलता है? आपने इतिहास पढ़ा ना — किस स्थिति पर होने के बाद वह मिलता है। आपने किसी पद की इच्छा रख ली, तो आपको देखना है क्या उस पद के लायक आप हो; तभी तो पद मिलेगा। आपने इच्छा तो रख ली। जैसे आप कोई पद ले लीजिए — आप शिक्षक हो। अब कोई व्यक्ति शिक्षक की इच्छा रख ले, तो वो शिक्षक का पद उसे कब मिलेगा? जब वो शिक्षक के लायक हो जाएगा। इच्छा से तो लायक नहीं हो सकता; वो गुण-धर्म होना चाहिए ना उसके अंदर। तो आप देखो कि उस परम सत्ता से मिला कौन। (आप कहते हो) जानवर में देखा, गुरु में देखा, मां में देखा, कोई आकर मदद कर दिया तो हमें (लगा) भगवान आ गए — ऐसे समाधान नहीं है। मैं फिर से कह रहा हूं — मेरी बातों पे गौर करो। अपनी बातें छोड़ दो, किसने क्या कहा छोड़ दो; मैं क्या कहना चाहता हूं वो सुनो, समझो। जिन लोगों ने उस परम सत्ता के बारे में बताया — उस स्थिति में पहुंचने के बाद ही मिलना होगा ना। तो उस स्थिति तक पहुंचने के लिए काम करो, अपने आप को उस लायक बनाओ। पद की इच्छा रखने से कोई पद थोड़ी मिल जाएगा। कोई इच्छा रख दे कि मैं इस पद पे आना चाहता हूं, तो क्या उसे पद दे दिया जाएगा? उस पद के लिए उसे परीक्षा देनी पड़ेगी; जब उस परीक्षा में पास हो जाएगा तो वो पद (मिलेगा)। तो आप देखिए कि जिस पद के लिए आपने इच्छा रखी, (वह योग्यता) अंदर क्यों नहीं है। ये आप देखो ना — ये सवाल आपका है, दूसरा नहीं है इसमें। यह सवाल आपसे ही आपका है, जवाब भी आपसे आपका है। किसी और के जवाब का कोई मतलब ही नहीं है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01