प्रश्नोत्तर P3-0189 · भाग 3
(लाइव) गुरु जी, क्या जातिवाद (हमारे फंसने का) सबसे बड़ा कारण नहीं है?
नहीं, सब है ना — देखिए, मिलाजुला के सब है। जैसे जाति पर मैं बोलता हूं, मैंने लोगों को बता दिया कि जात ऐसी चीज नहीं है, हमने पकड़ ली है। जैसे इस पृथ्वी पर कोई भी जीव अपने बच्चों को जन्म देता है, तो उसके मल को साफ करता है — मुंह से चाहे हाथ से; उस समय वह शूद्र होता है। फिर उसके बाद उसके भोजन की व्यवस्था करता है; उस समय वह वैश्य होता है। उसके बाद समाज से उसकी रक्षा करता है; उस समय वह क्षत्रिय होता है। उसके बाद वह उसको ज्ञान देकर छोड़ देता है; उस समय वह ब्राह्मण होता है। अब वह जीव जीवन जीने की शुरुआत जब ज्ञान से करता है, तो वह ब्राह्मण होता है; जब समाज से अपनी रक्षा करता है, तो वो क्षत्रिय होता है; जब अपने भोजन की व्यवस्था करता है, तो वह वैश्य होता है; और उसके बाद अपने मल-मूत्र को साफ करता है, तो वह शूद्र होता है। तो चार वर्ण पृथ्वी के हर जीव में हैं — यही है ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
अब ये चार तो तुम अपने लिए अपनाते हो; बिना अपनाए आप रह ही नहीं सकते, ये चार आपको अपनाना ही पड़ेगा। अब ये चारों अगर समाज के लिए अपना लिए, तो आप महात्मा हो गए; आप निकल जाओगे, इस भवसागर को पार कर जाओगे। और अगर आप चार में से एक भी अपनाए हो, तो आप सामान्य नागरिक हो; लेकिन एक को पकड़ के तीन से द्वेष कर रहे हो, तो आप फंस गए। चारों तो आपको अपने लिए अपनाना ही पड़ रहा है।
अब ब्राह्मण का क्या काम है? लोगों को मार्ग बताना — अब कौन सा मार्ग? जिस मार्ग का पता हो। क्षत्रिय का काम क्या है? रक्षा करना। तो अपनी तो कर ही रहे हो ना; अपने को सही जगह ही ले जाते हो, तो ऐसे ही दूसरों को भी सही रास्ता बताओ, और दूसरों की भी रक्षा करो। और इसके बाद ईमानदारी से आपकी भोजन की व्यवस्था हो — तो अपने लिए तो कर रहे हो, तो दूसरों के लिए भी करो। और उसके बाद सेवा — अपना मल-मूत्र साफ करो, जरूरत पड़ने पर किसी और का भी कर दो। तो चारों वर्ण अगर आपने अपना लिए, तो आप महात्मा हो गए। इसलिए महात्मा चारों को अपना लेता है — महान आत्मा हो गए; मतलब आप अब उस परम सत्ता से मिल लोगे।
तो ये वर्ण व्यवस्था है; ये चारों हर जीव में हैं, सिर्फ मानव में ही नहीं; चार को अपनाना ही पड़ेगा। अब आपको समझाने के लिए ज्ञान देने वाले को ब्राह्मण का नाम दे दिया गया, रक्षा करने वाले को क्षत्रिय का नाम दे दिया गया, भोजन की व्यवस्था करने वाले को वैश्य का नाम दिया गया, सेवा करने वाले को शूद्र का नाम दे दिया गया; क्योंकि अगर हम आपस में बात करेंगे तो कोई तो शब्द देना पड़ेगा, तभी तो हम-आप एक-दूसरे की बात को समझेंगे। तो यह है वर्ण।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01