प्रश्नोत्तर P3-0192 · भाग 3
(कुटिया में साधक) गुरु जी, आप परसों बोल रहे थे कि जब ये शरीर छोड़ के जाओगे तो कहां जाओगे, वो सोचो। मान लो मैं समझ लूं कि मैं परमात्मा के पास जाना चाहता हूं?
ये प्रश्न लेके बैठा करो — कहां से आए हो, कहां जाना है; जाना तो पक्का है, यार मैं जाऊंगा कहां? समझो मत। पहले तो प्रश्न ये है कि जाऊंगा कहां — ये मत समझो कि मैं परमात्मा के पास जाऊंगा। अरे भाई, परमात्मा का कोई अता-पता हो तो ना जाऊंगा। पहले तो यह प्रश्न खड़ा होगा कि शरीर छोड़ने के बाद जाऊंगा कहां। (कहोगे) मैंने ये पता कर लिया कि परमात्मा के पास जाना है — तो क्या मैं पता करने से परमात्मा तक पहुंच जाऊंगा? मैंने प्रधानमंत्री का पता लगा लिया, तो पता लगाने से थोड़ी ना (पहुंच गए); यात्रा करनी पड़ेगी ना; तब उसे कारण बताना पड़ेगा ना कि तुम उस लायक हो कि नहीं हो। पता लगाने से थोड़ी ना पहुंच जाओगे — और तभी तो (यह) काल्पनिक है। आप तो जब जाओगे, तब ना पता चलेगा।
तो पहले तो प्रश्न ले बैठो कि मैं जाऊंगा कहां, और मैं यहां से निकलूं कैसे। अभी तो आप इस जगह खड़े हो कि मैं यहां से कैसे निकलूं। राग-द्वेष, जितने विचार सता रहे हैं, पहले वहां से निकलोगे, तब ना प्रश्न खड़ा होगा कि मैं जाऊंगा कहां। पहले तो आत्मिक चिंतन करो कि मैं अपने आप को पहले छुड़ाऊं; जब मैं छुड़ा लूंगा, तब प्रश्न खड़ा होता है कि अब मैं जाऊं कहां। (मैं कौन हूं, कहां से आया, कहां जाना है —) वो घुमाते रहो। (रात को विद्वेष के सपने आते हैं —) कोई बात नहीं, आने दो विचार। लेके बैठ जाया करो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01