प्रश्नोत्तर P30-0061 · भाग 30
महाराज जी, आदमी की जिंदगी सांसों पर आधारित है ना? कहते हैं जिसको ज्यादा जीना हो वह सांसों पर काम करे।
इसकी खोज वो करे जिसको कम या ज्यादा जीना हो। हमें तो जीवन से परेशानी नहीं है, हम क्यों देखें? मैं अभी निकलूं तो अभी तैयार हूं, कई साल बाद निकलूं तब भी तैयार हूं — निकलना तो पक्का है। जिसको ज्यादा जीना है, भोग करना है, या जो दुखी होकर निकलना चाहता है, वो गिने अपनी सांसें, वो उसकी खोज करे। हम दोनों से परे हैं, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, इसलिए इन प्रश्नों से हमें कोई मतलब नहीं।
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वीडियो: आत्मग्लानि कब होती है ? #live_satsang #aadhyatmik #satsang #pratyakshgyan #yogijikasatsang · 2024-12-25