आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0068 · भाग 30

गुरु जी, आपने कहा था कि मैं जिस काम को करता हूं उसे करने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती, लेकिन भक्ति मार्ग में बोलते हैं कि सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड़ दो। इन दोनों में क्या अंतर है, कौन सा सही है?

देखो, ऐसा नहीं है। आप कर्म करो — मेहनत के साथ ईमानदारी, सत्कर्म अपनाओ। और आप यह देखो कि भाई जितना मैं कर सकता था मैंने किया, बाकी ऊपर वाले के हाथ में है। लेकिन ऐसा नहीं कि जब सब काम के लिए हम प्रयास करते हैं, तो सत्कर्म के लिए, अपने कल्याण के लिए प्रयास ना करें — प्रयास करना ही होगा। हम तो एक ही बात कहेंगे — कर्म के सिद्धांत को समझो। आप जैसा करते हो वैसा परिणाम आता है। यह सब बनावटी बातें हैं; इसके चक्कर में ना पड़कर जितना आपसे हो सके, उचित, अपने कल्याण के लिए करो। बात खत्म।

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