प्रश्नोत्तर P30-0085 · भाग 30
गुरुदेव, किसी के साथ लंबे समय रहना है और हम निस्वार्थ भाव से उसकी मदद कर रहे हैं, पर वह अपना नुकसान कर रहा है और हमारा भी नुकसान करता है। क्या उसकी और मदद करते रहना चाहिए?
उसका तुरंत त्याग कर देना चाहिए — तुरंत त्याग ही परम सुख है। आप उसकी मदद करके उसे गलत इंसान बना रहे हैं, तो उसके जिम्मेदार फिर आप हैं। अगर एक व्यक्ति की मैं मदद कर रहा हूं और वो पहले कम शराब पीता था, अब ज्यादा पीने लगा, तो गुनहगार कौन हुआ? उसका त्याग कर दो; हो सकता है उससे वो सुधर जाए। आपकी मदद से वो और बिगड़ रहा है, तो ऐसे व्यक्ति का त्याग कर देना उसके सुधार के लिए उचित है, नहीं तो उसके बिगड़ने में आपको भी दोष लगेगा। आप अपने आप को इतना सामर्थ्यवान बनाइए कि वो आपका नुकसान ना कर पाए; और अगर नुकसान कर रहा है तो उसे दंड दिलवाइए, कानूनन भी दिलवाइए। अहिल्या माता का बेटा समाज के लोगों को सता रहा था, तो उन्होंने अपने ही हाथी से उसे चिरवा दिया। आज इतने सम्मान से माता अहिल्या का नाम क्यों लिया जाता है? क्योंकि उन्होंने समाज के लिए त्याग किया, उस कुर्सी के धर्म को निभाया। कहने का मतलब है, आदमी गलत कर रहा है तो उसे रोकिए; एक-दो बार समझाइए, नहीं तो उसका त्याग करिए; अगर फिर भी कर रहा है तो उसे दंड दिलवाइए — कोई भी हो, क्या फर्क पड़ता है।
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वीडियो: अंतःकरण क्या है कहां स्थित है और क्या कार्य है ? #yogijikasatsang #live_satsang #Aadhyatmik · 2024-12-04