आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0135 · भाग 30

बाबा, (एक हजार रुपये की रिश्वत भी आदमी को) कितना घुमा रहा है — क्या ये बात सही है?

मैं आपको एक बात बताता हूं — कर्म का परिणाम, जितना आपने किया है, एक-एक का हिसाब करना पड़ेगा; माइनस-प्लस नहीं होता है। आपने अच्छा किया है तो अच्छा मिलेगा, बुरा किया है तो बुरा मिलेगा; सत्कर्म किया है तो सत्कर्म का मिलेगा — इस सहने में आपको शक्ति मिलेगी। पद पे रहते हुए कभी-कभी हम इतने आवेशित रहते हैं कि समझ नहीं पाते, और जब ईमानदार आदमी की बद्दुआ लगती है, तो दुनिया में कोई पैदा नहीं हुआ कि बचा ले — उसकी बद्दुआ घुमाती रहती है, चाहे वो एक ही क्यों ना हो। जब तक उसकी भरपाई नहीं होगी, तब तक ऐसे घूमते रह जाएंगे — चाहे करोड़पति बन जाओ, चाहे अरबपति बन जाओ, आप अशांत रहेंगे। इसलिए ईमानदारी-सत्कर्म करो, बस यही रास्ता है निकलने का। शरीर के द्वारा उचित काम करो, माफी मांगते रहो, जरूरतमंद की सेवा करते रहो, असहाय की सेवा करते रहो। जितना सामने वाला मजबूर था, जिस दिन वैसे मजबूर की सेवा करोगे और उसके रोम-रोम से आशीर्वाद मिलेगा, तब जाके आपको अशांति से मुक्ति मिलेगी — जब भरपाई होगी।

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