आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0159 · भाग 30

गुरु जी, (भीतर का) संग्रह खाली कैसे करें?

खाली कैसे करोगे — भरे कैसे हो? कौन से कर्म करके? कर्म तीन तरह के होते हैं — सात्विक, राजसी, तामसी। सात्विक कुछ भरता नहीं है; या तो राजसी में भरता है या तामसी में। या तो मान के चक्कर में आपने कर्म किया — राजसी कर्म; या किसी को सताने के चक्कर में कर्म किया — तामसी। अब एक काम करो — अब भरना बंद कर दो। सात्विक प्रवृत्ति अपना लो, तो भरना बंद हो जाएगा। पहले भरना बंद करो, अब सत्कर्म करो। जब आपने राजसी या तामसी प्रवृत्ति में कर्म किया, तो किसी ने आपको आशीर्वाद दिया, किसी ने श्राप दिया; तामसी किया तो लोगों ने श्राप ही दिया; राजसी किया तो मान बढ़ गया। तो सात्विक प्रवृत्ति अपना के अपने आप को सत्कर्म में लगा दो। जब आप किसी भूखे को भोजन कराओगे, तो रोम-रोम से उसका आशीर्वाद मिलेगा; किसी प्यासे को पानी पिलाओगे, किसी को मार्ग दिखाओगे — रोम-रोम से आशीर्वाद मिलेगा। जब भी मौका आ जाए, यह करो; इसका मौका प्रकृति देगी, सत्कर्म किसी के बस में नहीं है। और एक समय ऐसा आएगा, आपको उपलब्धि हो गई, तो पूरा जीवन आपका सत्कर्म में बीतेगा — तब तो आपको कुछ चाहिए ही नहीं, आपके द्वारा जो भी होगा संसार के लिए होगा। जा रहे हो, कोई भूखा है तो उसे भोजन करा दो; किसी के तन पर कपड़ा नहीं, कांप रहा है, तो वस्त्र दे दो। इससे निर्विकार होने में सहायता मिलेगी, इससे आप खाली होगे। खाली होने का यही रास्ता है, और कोई रास्ता नहीं है। किसी भी रास्ते से जाओगे, आना यही पड़ेगा — या तो आप सीधा इसे अपना लो, या घूम-फिर के और समय बर्बाद करके अपनाओगे। खाली होने का एकदम सरल तरीका है — सत्कर्म में लग जाना, बस; सत्कर्म का मौका जब भी प्रकृति दे, छोड़ना मत।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: #भटकाव किसका है मन का या खुद का ? (Is Distraction of Mind or Self? ) Explained in hindi · 2026-03-10