आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0158 · भाग 30

गुरु जी, अपेक्षाओं से तो मैंने अपने को परे कर लिया, संतुष्टि का भाव आ गया। अब विचार सिर्फ इतना है कि निर्लिप्त कैसे हुआ जाए, उससे अलग कैसे हुआ जाए?

ये प्रवृत्तियां छोड़ दो, बस — जो प्रवृत्तियां अपनाई हैं, जो आपको भटका रही हैं, छोड़ दो, तो निवृत्त आप अपने आप हो जाओगे। शुद्ध आप हो; शुद्ध करने के लिए कुछ नहीं करना है — बस आप अशुद्धि धारण किए हो, उसे छोड़ दो; वो नहीं छोड़ोगे तो शुद्ध नहीं हो पाओगे। उम्मीदें छोड़ दो, हर तरीके से; बस जांचते रहो। वो छूटते ही तो ज्ञान होगा, स्थिति हो जाएगी। अभी अपने पास बाहर का ज्ञान है, समझ है — हमने अपनी समझ को बाहर के ज्ञान के द्वारा विकसित किया है; उपलब्धि के बाद ये भी छूट जाते हैं। जैसे भोजन किया तो पोषण मिला, और भोजन मल बन गया — पोषण ऊर्जा में चला गया; ऐसे ही ये शब्द भी चले जाएंगे। इन शब्दों में ऊर्जा है; उस ऊर्जा के द्वारा अपने तक पहुंचो। एक दिन ये शब्द भी निकल जाएंगे, बचोगे आप।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: #भटकाव किसका है मन का या खुद का ? (Is Distraction of Mind or Self? ) Explained in hindi · 2026-03-10