प्रश्नोत्तर P30-0166 · भाग 30
गुरु जी, आपको तो भगवान या गुरु बनने का भी अवसर था, फिर आपने सेवक बनना क्यों चुना?
ज्ञान हुआ तो हमने कहा, यार भगवान बनना, गुरु बनना ये बड़ा सरल है इस दुनिया में — बहुत आसान। भगवान बनना होता तो मैं तो 2011 में ही बन जाता; बन भी गया था कुछ समय तक। लोगों की कामनाएं पूरी हों तो लोग फोटो लगा के पूजा करने लगे। फिर इसके बाद उन्होंने कहा कि सेवक का चुनाव कर — बस, ज्ञान हो गया है, प्रश्न के उत्तर दो, और जिसको परमात्मा भेजे बस उसको उस तक पहुंचाने की सेवा करो। अब हम उनकी सेवा करते हैं — जिन्हें परमात्मा से मिलना हो। भगवान बनना है, गुरु बनना है तो तुम्हें गिरने में टाइम नहीं लगेगा; लेकिन सेवक पैरों में रहता है, उससे नीचे नहीं गिरोगे। सेवक के आगे हाथ जोड़ने वाले को मोड़ने कोई नहीं आता; इसके सामने कोई नहीं खड़ा होता, पिघल जाता है। सेवक बनना सरल नहीं है — सेवक बन जाओ, बस बात खत्म।
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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24