प्रश्नोत्तर P31-0004 · भाग 31
गुरु जी, आप अपने शरीर का उचित ख्याल नहीं रखते — क्या यह अपने शरीर के प्रति हिंसा नहीं हुई?
नहीं, हिंसा नहीं हुई। जब मुझे तकलीफ होती तो हिंसा होती; मुझे ऐसी कोई तकलीफ भी नहीं होती है। चाहे आंखों में आंसू आएं, चाहे हंसी हो, मैं अंदर से खुश रहता हूं, हंसता ही रहता हूं और काम करता रहता हूं। अगर मैं जानबूझकर विपरीत करता — कि गर्मी है तो बर्फ में सोता, ठंडी है तो और बर्फ ले लेता अपने आप को सताने के लिए, और गर्मी है तो और आग जला लेता — तब मैं अपने आप को कष्ट दे रहा होता, क्योंकि मैं विपरीत परिस्थितियां पैदा कर रहा होता। लेकिन ऐसा मैंने कुछ नहीं किया। जितने में इस शरीर में रह सकते हैं उतना तो ख्याल रखना ही पड़ेगा, क्योंकि काम करना है तो शरीर को उतना तो रखना पड़ेगा जितने में आप काम कर सको।
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