आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P31-0011 · भाग 31

गुरु जी, आप एक ही बात को बार-बार समझा रहे थे — बात स्पष्ट हो रही थी, लेकिन बार-बार रिपीट होने से अजीब सा फील होता है।

आप समझ लिए, लेकिन मेरे लिए इनका भी तो महत्व है। ये जब तक नहीं समझेंगे तो इनके तरीके से हमें समझाना पड़ेगा ना। चाहे एक बार में समझें चाहे 100 बार में, कम से कम ये तैयार तो हैं। जितना मैं बोल रहा हूं उतना ये भी तो मुझसे बात कर रहे हैं; जब ये नहीं थक रहे तो मैं क्यों थकूं? ये जैसे समझेंगे मैं वैसे समझाऊंगा, और तब तक प्रयास करूंगा जब तक ये तैयार हैं। यहां सबकी अपनी-अपनी समझ है, सब अपनी समझ से यात्रा करते हैं, और हम सबके लिए काम कर रहे हैं। जब मुझे फाइनली पता चल जाएगा कि इस व्यक्ति में अभी समझने की क्षमता नहीं, तब बता दूंगा कि अभी आप इस बात को समझने लायक नहीं हो — जैसे छह-सात साल का बालक कहे मेरा विवाह करा दो, तो कहेंगे बच्चे अभी तुम विवाह के लायक नहीं हो, लायक बनोगे तब करवा देंगे। आप समझ गए, अच्छी बात है; समझने के बाद चुप रहिए, कुछ और नया आपको मिलेगा। ये प्रकृति विद्यालय है — दो में से एक बन जाओ, या तो सीखने वाले या सिखाने वाले। सीखने वाले हो तो सिखाने की बात कतई मत करना, नहीं तो भटक जाओगे।

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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27