प्रश्नोत्तर P31-0061 · भाग 31
गुरु जी, खुद को कैसे समझूं?
खुद को तो समझे ही हो — क्या स्थिति है। अगर ये कहते कि मैं दूसरों को कैसे समझूं, तो बात अलग थी। अगर कोई कहे कि मैं खुद को कैसे समझूं, तो खुद को तो पता है कि मेरी स्थिति क्या है, मैं कहां हूं, मेरा काम-भाव क्या है, क्या काम-वासना है, कैसी बेईमानी है। मेरी वासनाएं कैसी हैं, काम में मैं किस तरह की वासना बना के काम कर रहा हूं — वासना का मतलब बेईमानी होता है।
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