आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P31-0063 · भाग 31

गुरु जी, हमें डांट पड़ी।

आपको देखना है कि डांट क्यों पड़ी, डांट के पीछे रीज़न क्या है। सामने वाले ने मुझे डांटा क्यों? उसे डांटना क्यों पड़ रहा है? क्योंकि डांटने के पीछे भी तो उसकी ऊर्जा खर्च हो रही है — तो मैं उसे इतना विवश क्यों कर रहा हूं कि उसे मुझे डांटना पड़ रहा है? यह मुझे खुद समझना है। लेकिन मेरी शिकायत औरों से है कि मुझे कोई डांटता है। कोई किसी को ऐसे ही नहीं डांटता, उस डांट के पीछे कोई कारण है — काश तुम वो देख पाते। जैसे मुझे लोग डांटते थे कि कमाते हो, बचाते नहीं हो, सब खर्च कर देते हो, संचित करो। तो मैंने देखा भाई डांटते क्यों हैं — तो डांट के पीछे वो खिला रहे हैं और कुछ उम्मीद बना के रखे हैं; तुम उस उम्मीद पे काम नहीं कर रहे हो। ये डांटना तब बंद कर देंगे जब तुम इनका खाना बंद कर दोगे, क्योंकि खाओगे तो इनके तरीके से चलना पड़ेगा। सीधी सी बात है — कोई अगर डांट रहा है तो उसके पीछे कोई रीज़न होगा; तुम्हारे सुधार के लिए डांट रहा है।

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