प्रश्नोत्तर P31-0071 · भाग 31
गुरु जी, आज के सत्संग से यह पता चला कि कहीं ना कहीं मेरा लालच मुझे खींच कर ले जाता है। तो लालच से कैसे मुक्त हों?
बस ज़्यादा बर्तन धोने का भाव हटा दो। जितनी बर्तन की घिसाई कर रही हो, काश उतनी अपनी घिसाई कर लेती। ये बर्तन धोने की आदत पड़ गई है, क्योंकि अलग-अलग बर्तन धोने का अलग-अलग सुगंध मिल गया है — बर्तन धोने के साथ वो जूठन का सुगंध भी तो है, वो इतनी जल्दी थोड़ी चला जाएगा। तो लालच कहां से पैदा हुआ? सुगंध से, क्योंकि हमारी एक लत हो जाती है। तो मेरा यही कहना है — बर्तन धोने की जगह अपने आप को धो डालो, अपना कल्याण कर लो।
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