प्रश्नोत्तर P31-0105 · भाग 31
योगी जी, आप जहां हो, जिस मानसिक स्तर पर, वह कैसा महसूस होता है? क्या वह अत्यंत आनंदमय है?
अगर मैं कहूं मैं जहां हूं — अब आनंद को आपने किस भाषा में, कैसे फील किया है, कैसे समझा है? क्योंकि अगर मैंने कुछ दायरे में बांधा है, चाहे वो आनंद हो, चाहे सुख हो, चाहे दुख हो, तो उसका एक दायरा है। इसका कोई दायरा नहीं है, इसे बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि आनंद भी असीम है। उस स्थिति को बोल नहीं सकते। एक व्यक्ति को कभी दर्द नहीं हुआ, उसे कितना भी दर्द के बारे में बताएं, वो दायरे में ही समझ पाएगा। तो मेरा यही कहना है कि आप लोग उस स्थिति पर पहुंच सकते हो, और बहुत ही आसान है। लेकिन आपने अपने स्वभाव के कारण, अपनी धारणा के कारण इसे इतना कठिन बना दिया है, इसे दुनिया का सबसे कठिन कार्य बना दिया। मेरा कहना है कि ये सबसे सरल कार्य है। बस अपनी बनाई हुई धारणाएं तोड़नी पड़ेंगी, सही-गलत से ऊपर उठना पड़ेगा, और बहुत आसानी से आप उस परम आनंद तक पहुंच सकते हैं।
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वीडियो: 27 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-21