प्रश्नोत्तर P31-0125 · भाग 31
गुरु जी, मैं लोगों की बात जल्दी मान लेती हूं।
यहां कोई किसी की बात नहीं मानता। यहां सब या तो दबाव में मानते हैं या तो अपनी जरूरत में मानते हैं। इस दुनिया में यहां कोई किसी की बात मान नहीं रहा।
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