आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P31-0134 · भाग 31

गुरु जी, इंसान भगवान की सेवा करता है, आस्था बनाए रखता है, करते-करते उम्र ढल जाती है, जीवन बीत जाता है, पर भगवान के दर्शन नहीं होते। भगवान कैसे मिलेंगे — गुरुद्वारे से, ध्यान करने से, या आरती-घंटी बजाने से? ऐसा कौन सा मार्ग है कि इंसान अपने जीवन में भगवान को प्राप्त करे?

आपको सीधा और सरल मार्ग बता रहे हैं। चार मार्ग से लोग यात्रा करते हैं — भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग, ध्यान मार्ग और योग मार्ग। किसी भी मार्ग से चलोगे तो ज्ञान की जरूरत होती है, आखिर में ज्ञान ही चाहिए। अब देखना यह है कि भगवान चाहिए कि भगवान से कुछ चाहिए। संसार में सब अपने-अपने लोभ-लालच में भगवान को पूजते हैं — एक नारियल चढ़ाते हैं कि भगवान मेरी यह मनोकामना पूरी कर देना। भगवान तो आपको चाहिए ही नहीं, आपको तो अपनी कामनाएं, अपनी इच्छा चाहिए। अगर भगवान आ जाए और कहे कि मैं भगवान हूं, तो बोलेंगे कुछ दो, कोई चमत्कार दिखाओ, लोहे को सोना करके दिखाओ। आप ईमानदारी से देखो, सच में भगवान खोज रहे हो कि भगवान से कुछ चाहिए। पहले तो अपने आप को प्राप्त करना चाहिए — सब प्राप्त करने में हमने अपने आप को भटका दिया है। पहले आत्म दर्शन करो, यानी स्वयं का दर्शन। अभी तो पता नहीं है कि मैं शरीर हूं कि मैं आत्मा हूं, बस शब्दों की जानकारी हमारे पास है। भगवान का मतलब है जो जन्म-मरण से मुक्त हो जाए — भग मतलब योनि, वान मतलब चलाने वाला; जो इससे मुक्त हो जाए, वह भगवान हो गया। जिसने अपने आप को नहीं समझा वो इंसान, और जिसने अपने आप को समझ लिया वो भगवान। हम अनेक इच्छाओं की पूर्ति करने में शरीर बदल रहे हैं, जन्म-मृत्यु के चक्कर में फंसे हैं। अगर आप कामनाओं से मुक्त हो गए और जन्म-मरण से मुक्ति पा ली, तो आत्म दर्शन हो गया, और आत्मज्ञान के बाद ब्रह्म की यात्रा होगी। परमात्मा अलग है, भगवान अलग है। तो भगवान खोजने की जरूरत नहीं है। माला भी जपते हो तो किसके लिए — माल मिल जाए, मेरा काम अच्छा हो जाए, मैं ठीक हो जाऊं — तो कहां से भगवान मिलेगा?

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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12