प्रश्नोत्तर P31-0144 · भाग 31
गुरु जी, मैं देख पा रहा हूं कि बस मैं ही मैं हूं, मेरे अलावा कुछ नहीं। इसके बाद और कुछ है क्या? मार्गदर्शन करें।
जब आपके अलावा कुछ भी नहीं है, तो पूछ किससे रहे हो? कौन पूछ रहा है, किससे पूछ रहा है, यह पक्का किससे किया जा रहा है? जब आप ही हो, दूसरा है ही नहीं, तो पक्का क्यों करवाना पड़ रहा है? पक्का तो दो में होगा; एक में तो कुछ पक्का-कच्चा करने की जरूरत नहीं है। अगर एक ही लाइन है, तो वह ना बड़ी हो सकती है ना छोटी। लेकिन अगर पूछ रहे हो कि इससे छोटी या बड़ी कोई लाइन है, तो इसका मतलब दूसरी लाइन होने की संभावना है। एक लाइन को छोटा या बड़ा करने के लिए एक लाइन आपको खींचनी पड़ेगी, मतलब दूसरा आ जाएगा। यह बस बनावटी बातें हैं कि मैं ही मैं हूं। अगर मैं ही मैं हूं, तो फिर पूछने के लिए भी कुछ नहीं बचा।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12