प्रश्नोत्तर P31-0161 · भाग 31
गुरु जी, हर एक कर्म को हम अगर पूजा भाव से करें, तो क्या उसे ध्यान कह सकते हैं — कर्ता का मिट जाना?
हां, अगर आप निष्काम सेवा कर रहे हैं, तो यह कर्म पूजा हो गया। इसलिए कि आप ध्यान से कर रहे हो, यह ध्यान ही हो गया; ध्यान कुछ अलग नहीं है। इतना समझना कि ध्यान से आप नहीं हो, आपसे ध्यान है। हम अपने आप से ज्यादा बाहर को महत्व दे देते हैं, इसी में हम भटक जाते हैं। पूर्ण अपने आप को अपूर्ण से पूर्ण करना चाहता है — यही उसकी अपूर्णता है। वह स्वयं पूर्ण है।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12