प्रश्नोत्तर P4-0028 · भाग 4
(लाइव) गुरु जी प्रणाम। आत्मज्ञान होने पर क्या इस शरीर को और (अंदर की) आत्मा को अलग-अलग देख सकते हैं?
जब यात्रा करते हैं ना, तभी देख लेते हैं। आत्मज्ञान के बाद की बात छोड़ो — यात्रा भी तभी शुरू होगी जब आप अपने आप को और शरीर को अलग महसूस कर पाओ। जैसे आपसे कोई कहे कि हवा है या नहीं, तो तुम कहोगे है। क्या उस हवा को देखा? लेकिन स्पर्श इंद्रिय से आपने महसूस किया, तो वो भी तो देखना है। पूरी दुनिया कह दे कि हवा नहीं है, तो आप मान लोगे? हवा आपने महसूस की; और कोई कह दे कि हवा एक ही तरह की होती है, तो आप कहोगे नहीं — ठंडी भी होती है, गर्म भी होती है। क्या ठंडी और गर्म हवा को आपने देखा है? नहीं; इस शरीर के द्वारा महसूस किया है। पांच इंद्रियां हैं, तो पांच इंद्रियों में से एक इंद्रिय द्वारा आपने उसे देखा है।
तो आध्यात्मिक यात्रा तभी शुरू होती है जब आपने अपने आप को और शरीर को अलग देख लिया है। अगर नहीं देख पाओगे, तो आप आध्यात्मिक यात्रा शुरू ही नहीं कर सकते हो। आत्मज्ञान के बाद की छोड़ो — शुरुआत ही यहीं से है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01