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प्रश्नोत्तर P4-0053 · भाग 4

(कुटिया में साधक) बातें गहरी हैं; चार लोगों के सामने बातें कर लेना आसान होता है। मुझे लगता है, अगर मरने से पहले तक वो अनुभूति नहीं हुई, तो सब समय बर्बाद ही किया। तो क्या अनुभूति के बाद (आगे का) रास्ता शुरू होगा?

हां, आत्मानुभूति के बाद — उसके बाद जब हम अपने आप में स्थिर हो जाएंगे — उसके बाद यात्रा शुरू होगी। कहने का अर्थ ये है कि जहां से (मूल का) रास्ता कटता है, उसकी जगह हम कहीं और घूम रहे हैं। तो अभी पहले हमें (उस) रास्ते पर आना है, एक जगह; उसके बाद फिर यहां आना। तो यहां आने के रास्ते के लिए — अभी तो हम कहीं भटक रहे हैं; वहां से मेन रास्ते पर आना है। तो अभी हम भटक रहे हैं, यहां तो पहुंचे ही नहीं, फिर आगे के रास्ते की तो बात ही छोड़ो। तो हम भटक रहे हैं और बोल रहे हैं कि अरे, ये होता है, वो होता है — बड़ी-बड़ी बातें। लेकिन मेन रास्ते तक, चौराहे तक तो पहुंच ही नहीं पाए। केंद्र उसी को कहते हैं। (अनुभूति होती है तो पता चलता है कि कहीं जाना ही नहीं है —) हां, जाने से मुक्त हो जाते हैं।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01