प्रश्नोत्तर P4-0059 · भाग 4
(कुटिया में साधक) जैसे नदियों का पानी समुद्र में जाता है, वैसे हम (ऊर्जा) मूल में जाते हैं — पर समुद्र का पानी बरसात बनकर फिर नदी में आ जाता है, तो यह चलता ही रहता है। और सूरज से सुबह से शाम तक जो रोशनी (ऊर्जा) निकली, वह यहीं यूज़ हो गई; सूरज चाहकर भी उसे वापस नहीं ले सकता, और वह भी चाहकर सूरज तक नहीं जा सकती। तो क्या यह उदाहरण यहां सेट नहीं होता?
सूर्य — आपने सूर्य का बोला, तो सूर्य ऊर्जा दे रहा है, उजाला दे रहा है, धूप दे रहा है, ताप दे रहा है; तो वो भी तो किसी से (लेकर) दे रहा है, उसके पास भी तो कहीं से आ रहा है। हमें नहीं पता है कि कहां से — यही तो गड़बड़ी हो जाती है। वह स्रोत है, लेकिन स्रोत सीधा उससे नहीं है; उसमें भी (ऊर्जा का) स्रोत कहीं से आ रहा है। तो ये यहां से होके वहीं जा रहा है, बस ऐसे घूम रहा है; मेन स्रोत तक ये पहुंच रहा है। वो अग्नि बन रहा है — अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल, आकाश; खाली स्पेस को आकाश तत्व कहते हैं — तो ये पंच तत्व में विलीन हो रहा है। सूर्य से ये सीधा थोड़ी ना आ रहा है; सूर्य भी तो कहीं से ले रहा है।
लेकिन अब ये यहां खत्म थोड़ी ना हो रहा है। कोई चीज खत्म नहीं हो सकती, रूपांतरण हो सकती है। ये घुमा-फिरा के वहीं जा रहा है। जैसे अभी हम साधन से विद्युत को मशीन में लेते हैं, फिर हम यूज़ करते हैं, तो वहीं चला जाता है ना; कहां खत्म होता है? रूपांतरण होता है। कोई चीज खत्म नहीं होती है; रूप का नाश होता है, रूपांतरण होता है, खत्म नहीं होता — इसको विशेष ध्यान रख कर लेना। ये यूज़ होकर वहीं जा रहा है।
अब आपको इसको पता लगाने के लिए कि कहां जा रहा है, तो सूर्य के पीछे जाना पड़ेगा; पहले देखना है कि ये आ कहां से रहा है; और देखोगे तो वहीं जा रहा है। उसकी यात्रा यही है कि वहां से आना और फिर वहीं जाना; ऐसे यहां हर वस्तु घूम रही है। जैसे आज आप कपड़ा पहने हो, तो आपको क्या लग रहा है — ये पहली बार आप ही पहने हो? इसके पहले कहीं वो नहीं था क्या? इस रूप में नहीं था; भिन्न-भिन्न रूपों में तत्व घूम रहा है। और (यह) चाहिए में घूम रहा है। चाहिए से मुक्त हो गए, बात खत्म — तुम रूप से मुक्त हो जाओगे। तो आप बाहर के रूप से मुक्त होगे, तो आपको आत्म का बोध होगा, आत्मज्ञान होगा; और जब आप इस रूप से — अपने पिंड से — मुक्त हो जाओगे, तो आपको ब्रह्म का ज्ञान होगा। तो अभी तो आप रूपांतरण में फंसे हुए हो। ब्रह्मज्ञान (की बात छोड़ो) — पहले तो आत्मज्ञान तक पहुंचो। अब आत्मज्ञान क्या है, ये भी पूछोगे — पहले तो आप पहुंचो, यात्रा तो करो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01