प्रश्नोत्तर P4-0065 · भाग 4
(कुटिया में साधक) मैं एक मां को गले लगा रहा हूं, एक पत्नी को गले लगा रहा हूं — दोनों में भाव का अंतर रहता है। तो ये भाव कैसे प्रकट होता है?
भाव ऐसे प्रकट होता है कि पत्नी से कुछ और मिल रहा है, मां से कुछ और मिल रहा है। उनके शरीर के द्वारा मां से कुछ और मिला है और पत्नी से कुछ और मिला है, इसलिए जब हम गले लगाते हैं, तो भाव अलग हो जाते हैं। जैसे आप आंख बंद किए रहो, देखो भी मत, और आपके हाथ में दोनों का हाथ दिया जाए — एक पत्नी का, एक मां का — और बताया जाए कि मां वाला हाथ पत्नी का है, और पत्नी वाला मां का है; तो आप दोनों हाथ से अलग-अलग फील करोगे। अगर आपको बता दिया जाए कि यह पत्नी का हाथ है, तो आप उसी हाथ से पत्नी वाली फीलिंग लोगे — समझना इस बात को — क्योंकि अभी आपने रूप को देखा नहीं ना। और पत्नी वाले हाथ को बता दिया कि मां का हाथ है, तो आप मां वाली (फीलिंग लोगे); और जैसे ही आप आंखों से देखोगे, तुरंत फीलिंग बदल जाएगी, आत्मग्लानि होने लगेगी। क्योंकि पत्नी से और कुछ मिल रहा था, मां से और कुछ मिल रहा था। हमारी जरूरतों ने ये अलग-अलग ऐसा बनाया; जैसी हमारी कोई जरूरत (जिसने) पूरी की, वो हमारे लिए वो हो गया।
वही दोस्त को कभी गले लगाते हैं, बड़ा सुकून मिलता है; और जब हमारे तरीके का नहीं होता, दुश्मन हो जाता है, तो उसको देख के भी गुस्सा आता है। सुकून कहां चला गया? उसी शरीर को देखकर एक दिन सुकून आ रहा था, और उसी शरीर को देखकर घिन आ रही है — क्यों? क्योंकि आपके तरीके से नहीं हुआ। बात यहां सिर्फ आपके तरीके की है; तरीके में भाव है। आपके तरीके से पूरा हुआ, तो वैसा भाव पैदा हो गया; नहीं पूरा हुआ, तो ऐसा भाव पैदा हो गया।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01