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प्रश्नोत्तर P4-0139 · भाग 4

(लाइव) मां नर्मदे हर गुरु जी। आत्मज्ञान ही पूर्ण मोक्ष है, आत्मा-परमात्मा एक ही हैं — आप भी कहते हो 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति'; अद्वैत सिद्धांत दोनों को एक ही मानता है। इसके बारे में कुछ बताएं।

परमात्मा से आत्मा है। तो अलग-अलग तब है — देखिए, जैसे मान लीजिए एक अंगूठी बनी है, एक चेन। अब वो अलग-अलग हैं, क्योंकि एक अंगूठी है, एक चेन है, और दोनों में सोना है, धातु है। लेकिन दोनों को पिघला दिया जाए, तब जैसे ही रूप का नाश हुआ, तत्व में आएंगे, तो आप कहोगे ये भी सोना है, ये भी सोना है — एक जैसा है; भार में कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन है एक जैसा। तो वैसे ही परमात्मा से आत्मा है। अब सागर में से या नदी में से एक बूंद निकालें, तो निकलने वाला जरूर कम होगा। तो हम परमात्मा से हैं; कहीं ना कहीं हमें पूर्णता के लिए परमात्मा की जरूरत है। अब वहां जाने के बाद देख लेना कि तुम दोनों एक ही जैसे हो कि नहीं। पहले यात्रा तो करो।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25