प्रश्नोत्तर P4-0157 · भाग 4
(वही साधिका) जब हमने जांच लिया कि इनके मार्गदर्शन से मेरी यात्रा हो सकती है, और सरेंडर करके अनुसरण करने लगे — तब अनुसरण करते-करते अगर हमारे साथ कोई अनहोनी हो जाए, शरीर छूट जाए, तो क्या होगा?
यहां तक है कि अगर गुरु पूरी तरह योग्य है — मैं एक गुरु-स्थिति की बात कर रहा हूं, क्योंकि हमें पूरी तरह जांचने के बाद, गुरु योग्य है, तभी उसके प्रति पूरी तरह समर्पण कर देना चाहिए; और जब हम समझ जाएंगे तो समर्पण हो जाएगा, करना भी नहीं पड़ेगा — तो अगर गुरु योग्य है और किसी साधक का, किसी शिष्य का शरीर छूट जाता है, तो गुरु में इतनी क्षमता है कि वो अगला शरीर उसके लिए लेगा; उसे ऐसे नहीं छोड़ेगा, उसको तार के ही रहेगा, चाहे उसे जितने जन्म लेने पड़ें, कितनी बार उसे आना पड़े। लेकिन मैंने कहा ना — डाउट, संशय एकदम नहीं। ज्यादातर हम बहुत चालाक हैं। अब (एक साधक) सामने ही हैं — इतना इनका समर्पण था, लेकिन कहीं ना कहीं डाउट था, और एक व्यक्ति के द्वारा पैदा हो गया। निमित्त वो बना, लेकिन डाउट इनके ही अंदर था; ऐसा नहीं कि उसने डाउट पैदा किया। ऐसे ही हमारे अंदर संशय रहता है, डाउट रहता है; समय आने पे पता चलता है, परिस्थितियां पैदा कर देती हैं कि देखो, डाउट था। अगर गुरु पूरी तरह योग्य है, आपने उसे पूरी तरह समझ लिया, और डाउट एकदम नहीं, संशय एकदम नहीं, आप उसके बताए हुए मार्ग पे पूरी तरह चल रहे हो — तो अगर आपका शरीर छूट भी गया, तो वो पक्का आपके लिए शरीर लेके आएगा; जहां भी आप रहोगे, वो आपका कल्याण करेगा ही करेगा, वो भी आपको नहीं छोड़ेगा।
जैसे कोई मानव है, प्रशासन से, कानून से कोई मतलब नहीं है; लेकिन अगर उसने कोई अपराध कर दिया, तो प्रशासन पूरा (उसके पीछे) रहता है — पोस्ट बदलती रहती है, लेकिन कहीं भी हो, उसे लाओ, कैसे भी करके, पूरा कानून उसके पीछे लग जाता है। वैसे ही आपके पास डाउट नहीं है, संशय नहीं है, गुरु-पद पे वो है, तो अगर आपका शरीर छूटता है तो वो फिर आपके लिए आएगा; वो आपको बिना तारे छोड़ेगा ही नहीं। ये रामकृष्ण परमहंस की भी वाणी है — उन्होंने कहा कि जैसे शेर के जबड़े में मांस आ जाए तो वो छोड़ता नहीं, वैसे गुरु के हाथ में अगर एक बार तुम आ गए, तो वो तुम्हें छोड़ेगा नहीं — अगर तुम शिष्य हो तो।
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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30