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प्रश्नोत्तर P5-0007 · भाग 5

(वही साधिका) कोई आपसे पूछे कि आपकी स्थिति क्या है, तो कैसे पता चले? और यहां आने वाले कुछ लोग इतनी जल्दी क्यों चले जाते हैं — क्या उनकी स्थिति इतनी जल्दी पता चल जाती है?

मुझसे एक व्यक्ति आया, रायपुरा में, जहां के वो नारायण (बाबा) हैं। उसने कहा कि आपकी स्थिति क्या है? हमने कहा — देखो, मैं अपनी स्थिति बताऊंगा, तो तुम जहां हो, वहीं से समझोगे; और कैसे मैं सिद्ध करूंगा कि मेरी स्थिति ये है? कह तो दूंगा — क्योंकि हर आदमी अपने आप को महान बताने के लिए स्थिति तुमसे तो आगे ही बताएगा, क्योंकि तुम मेरे नीचे बैठे हो; अगर (नीचे) होगा भी, तो मैं कहूंगा तुमसे ऊपर हूं, नहीं तो तुम तुरंत कुर्सी से उतार दोगे। हर आदमी यही करेगा ना। तो हमने कहा — एक उपाय है, मैं वो बताता हूं, इससे पता चल जाएगा, सिद्ध हो जाएगा कि मेरी स्थिति क्या है, तुम्हारी स्थिति क्या है। यहां पे मैं उस जगह बैठा हूं — प्रश्न के उत्तर दूंगा; तुम बैठे हो प्रश्नकर्ता की जगह। तुम मुझसे प्रश्न करो, मैं उत्तर दूंगा — इसमें से एक नंगा होगा ही होगा। मैं नंगा हो जाऊं, तो समझ लेना तुम्हारी स्थिति हाई है, मेरी लो है, बस जगह बदल गई है; और तुम नंगे हो जाओ, तो मेरी स्थिति फिर समझ ही लेना कि तुमसे तो ऊपर है ही है। दो में से एक को तो नंगा होना ही होना है — देख लेना, कितनी देर में कौन नंगा होता है। तब उसने सवाल करना चालू किया, तो फिर वो नंगा हो गया। बोला — अब समझ गए, स्थिति तुमसे ऊपर है। बस, इतनी सी बात है। (इनके साथ कैसे बात करनी है, वो भी समझना है —) तभी आप टिक पाओगे, नहीं तो टिक ही नहीं पाओगे; आप भूल से (यहां) चले भी गए, तो भाग जाओगे यहां से — मिनटों में लोग गए हैं। (एक व्यक्ति) बोलते ही बोला — हठयोग से गुस्सा चला जाता है, मेरा चला गया। मैंने कहा — हठयोग से गुस्सा जाता ही नहीं। (उसने फिर कहा) हठयोग से गुस्सा जाता है। मैंने कहा — अगर गुस्सा चला गया होता, तो तुम दो बार रिपीट ही नहीं करते; इसका मतलब है कि (गुस्सा) सूक्ष्म है। तुमने दो बार रिपीट किया — एक बार कहा गुस्सा चला गया, और एक बार कहा किताबों में लिखा है। (फिर मैंने) बोला — स्नान वगैरह करना है, कर लो; बोले — बस आपके दर्शन के लिए आया था, जा रहा हूं। बोला — जाओ। ऐसे-ऐसे लोग आते हैं — गुस्से से गए। अरे भाई, देखिए, मैं एक ही बात कहता हूं — दो में से अगर एक पक्का है, या दोनों पक्के हैं, तब तो पहुंच जाओगे; अगर दो में से कोई कच्चा है, तो भाग लेगा — या तुम, या मैं। तुम पक्के हो, (और) अगर मैं कच्चा हूं, तो मुझे भागना पड़ेगा। मैं पक्का हूं, तुम भी पक्के हो, तो तुम्हारा पहुंचना भी पक्का है। और मैं पक्का हूं, तुम कच्चे हो, तो तुम टिक ही नहीं पाओगे। मैं एक साल से इस स्थान पे बैठा हूं, मैं यहीं हूं — यहां पता नहीं कितने चेहरे बदले। और मैं हर प्रश्न का (उत्तर) बोलता भी हूं; और जिस दिन कोई सिद्ध कर दे कि आपने आध्यात्मिक प्रश्न का उत्तर नहीं दिया, मैं यहां की जगह छोड़ दूंगा — ये भी बात बताई। मैं ऐसे ही यहां नहीं बैठा हूं। और मैं सामने बोल भी देता हूं — यहां सीखने आए हो, आप सीखने वाले स्थान पे बैठो, सिखाने की बात कतई मत करना। अगर सिखाना हो, तो आप फिर ऐसी जगह बनाओ, और जाओ, ज्ञान दो। आप सीखने वाली जगह बैठो, मैं सिखाने वाला — तब आप बैठो, नहीं तो नहीं। ऐसे तो 20 से मैं घूम रहा हूं, लेकिन 2024 से मैं यहां बैठा हूं, और अभी भी बैठा हूं; पता नहीं कितने चेहरे बदल गए।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17