प्रश्नोत्तर P5-0014 · भाग 5
(वही साधक) गीता में कृष्ण ने कहा कि दुख से मुक्ति पानी है तो मोह छोड़ो, लालच, कामना छोड़ो। जैसे इन (साधिका) की मम्मी से बात नहीं हो पाती और इन्हें दुख है — तो यह मोह है ना? उम्मीद और मोह में क्या अंतर है? और आप अपनी बहन का दुख सुनकर भी कह देते हैं 'रह अपने दुख में' — आपको उसके दुख से दुख नहीं होता, आपने यह डिटैचमेंट कैसे किया?
(दुख) तभी तक है, जब तक उम्मीदें हैं। उन्होंने अपनी बात कही, आप अपनी बात कह दो, बात खत्म। (इनकी उम्मीद है कि मैं समझ गई, वो भी समझ लें —) उम्मीद में ही मोह छिपा हुआ है। जब आपको सामने वाले से कुछ मिलता है, ठीक से, अपने तरीके से, तो उसमें मोह, आसक्ति, बंधन, अटैचमेंट होने लगता है।
(बहन के दुख से डिटैचमेंट —) किया नहीं। वो उनका दुख है — उनका बेटा है, उनका पति है, और ये होगा ही होगा — बीमारी होगी; एक समय ऐसा (आएगा), शरीर छूट जाएगा। अगर मान लीजिए पति का छूटे, (तो) बहन रोएगी कि विधवा हो गई; या उसका छूटेगा, तो ये (पति) कहेगा मेरा बर्बाद हो गया, या कहेगा दूसरी करा (दो), जैसे उसने कहा; बेटे को कुछ हुआ, (तो) बाप रोएगा — ये तो होना पक्का है। हम भी जाएंगे, तो कुछ आंसू हम भी निकाल लेंगे — (जब) बहन (के आंसू) निकलेंगे, तो हम भी रो लेंगे। (अगर वो कहें कि आप स्वार्थी हो —) कोई बात नहीं, (हां) मैं हूं, उसमें क्या हुआ? (उन्होंने) जैसा समझा, बोला — मैंने उसे स्वीकार किया, तो (मैं) क्या करूं?
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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17