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प्रश्नोत्तर P5-0019 · भाग 5

(कुटिया में साधिका) गलतियाँ होती रहेंगी — हम गिरे ही हुए हैं; यहाँ आकर गलतियाँ ज्यादा निकलती हैं। अगर आप हमारे लिए दरवाजा बंद कर दोगे तो ठिकाना नहीं रहेगा। अपराधी की तरह अंतिम विकल्प भी तो होना चाहिए — क्या दंड काटकर फिर आने का अधिकार नहीं?

जब अबोध थी तो गए क्यों? वही मूर्खता है — जाना नहीं चाहिए था। बालक जब रहता है तो माँ को छोड़ के भागता नहीं; जाता भी है तो माँ का ध्यान रहता है। यहाँ दरवाजा खुला है। आप जब जाते हो तो सामने वाले को समझो। मैंने सुबह जाना बोला; जो रुके — उनसे टेस्ट भी होता है। अनजाने में गलती और जानबूझकर समझ के की गई गलती अलग है — समझ के की तो अपराध। सजा इस शरीर में रहने से नहीं है; सजा ये है कि इस शरीर में रहते हुए पता नहीं कि मैं कहाँ से हूँ। और पता भी है तो पता है कि ये मिट जाएगा — ये सजा है। रियल में आप इस समय एक परेशान इंसान हो; पहले उस स्थिति से निकालो, तब रियल में क्या है पता चलेगा। बाहर की जानकारी कभी पूरी नहीं होती; खुद का ज्ञान पूरा हो जाता है।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17