प्रश्नोत्तर P5-0032 · भाग 5
आत्मज्ञान हुआ तो क्या ऐसी चीजें बता सकते हैं जिससे पता चले कि हो गया? प्रश्न फिर खड़े होते हैं क्या?
प्रश्न हट गया। बस बात खत्म। जैसे हमने भोजन किया तो भूख हट गई। पता चल गया, पेट भर गया। अगर भूख ना हटे तो पेट नहीं भरा। प्रश्न खड़ा नहीं होता। प्रश्न से मुक्त हो गया वो। प्रश्न खड़ा ही नहीं। खड़ा भी करना चाहे तो हँसी आएगी। पूछ ही नहीं सकता। क्या पूछेगा? ऐसा नहीं कि आगे जाने का रास्ता नहीं पूछेगा। व्यवहारिक जगत में वो पूछेगा, लेकिन अंदर से प्रश्न नहीं उठ रहे। अंदर से कोई प्रश्न नहीं है। एक भी प्रश्न पैदा भी करना चाहे तो नहीं कर सकता।
गुस्सा, मोह, सब खत्म हो गया, क्योंकि कुछ है ही नहीं। एकदम नहीं है, जरा सा भी नहीं है। क्रोध भी उसे करना पड़ता है, रहता नहीं है। उसे अपने साथ जबरदस्ती कर-कर के क्रोध करना पड़ता है, क्योंकि यह व्यक्ति क्रोध से ही समझेगा। ऊर्जा से भी मुक्त हो गया। कुछ अलग ही है वो। आप जिस पॉजिटिव-नेगेटिव ऊर्जा की बात करते हैं, उससे तो बहुत परे हो गया वो। अब वो दायरे में नहीं रहा। वो दायरे से मुक्त हो गया। उसे सामने समाज की दो स्थितियाँ दिखती हैं। एक कि आप वो हो, परम सत्य। एक, आपने अज्ञानता को पकड़ा है। ये दोनों स्थिति आप में वो देख पाता है, क्योंकि आप जहाँ पर हो वहाँ से वो आया है। इसलिए आपकी वो दो स्थिति देखता है। और उसमें वो शब्दों से मदद कर सकता है। शब्दों के बाद आंतरिक भी मदद कर सकता है। कब? जब आप उसके शब्दों का उपयोग करोगे। नहीं तो नहीं। और शब्दों का उपयोग कोई कर रहा है या नहीं कर रहा, ये पता चल जाता है। आप पढ़ाते हो तो पता चल जाता है कि उसने होमवर्क किया या नहीं किया। एक शिक्षक को जैसे पता चल जाता है।
मेरे समझ से बहुत सरल है। अगर आप चाहते हो तो सबसे सरल यही है। लेकिन अगर आप चाहते हो तो। हम चाहते होते तो हम धरती पर ही नहीं आते। अब तो आ चुके हैं। अब आत्मज्ञान चाहोगे तो आपके लिए एकदम संभव है, क्योंकि वो पहले से मौजूद है। आपको कहीं से कोई देगा नहीं। यहाँ बस छुड़ाने की बात हो रही है। आत्मज्ञान कोई किसी को करवाता नहीं है। बस कैसे छूट जाओ, उसके लिए यात्रा करवाता है। अगर आप चाहो तो पक्का है। और आप नहीं चाहो तो कोई किसी को करवा नहीं सकता। अज्ञानता का भी आपको पता है, तो आत्मज्ञान होगा तो आपको ही पता चलेगा पहले। प्रश्न उठ रहे थे, वो हट जाएँगे, उत्तर होंगे। अभी तो वो स्थिति नहीं है। जब आत्मज्ञान हो जाएगा तो बात खत्म हो जाएगी। प्रश्न पैदा भी नहीं कर पाओगे। चाहोगे तो भी पैदा नहीं कर पाओगे।
काम करके भी वो काम नहीं करता। क्रोध करके भी वो क्रोध नहीं करता। काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह, उसके अंदर एक परस भी नहीं रह जाता। अगर ये एक परस भी रहे तो उसे ज्ञान ही नहीं हो सकता। असंभव। मद जब बाहर आता है तो अहंकार का रूप ले लेता है। मद, लोभ और मोह खत्म हो जाते हैं। मतलब कर्ता का भाव खत्म हो जाता है, पूरी तरह। और मेरा का भाव पूरी तरह अमन की स्थिति में चला जाता है। अमन मतलब मन नहीं है। जब चाहिए तो मन आ जाएगा। जब तक शरीर है, तब तक मन शरीर के लिए काम करता है। आपके पास नहीं होता, मन शरीर के लिए काम करता है।
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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18