प्रश्नोत्तर P5-0096 · भाग 5
आप कहते हैं प्रकृति गुरु बनती है जब कोई गुरु न मिले — प्रकृति गुरु कैसे?
बस यह आखिरी में पता चलता है। प्रकृति आखिरी गुरु है। जब आपको कोई बताने वाला नहीं मिलेगा, तो आखिरी में प्रकृति आपको ज्ञान करवा देगी। ज्ञान पहले से मौजूद था, आप छूट गए, पूरा तरह। खोजते-खोजते खोजने को कुछ नहीं बचा, तो ज्ञान ही तो बचेगा। क्या बचेगा? आपको प्राकृतिक ज्ञान हो जाएगा। खोजते-खोजते जब खोजने को कुछ नहीं बचेगा, सब खत्म हो जाएगा, तो खोजने वाला भी खत्म हो जाएगा। क्योंकि उसी के सहारे तो खड़ा था। खोज के सहारे खोजने वाला बचा था, तो खोजने वाला भी खत्म हो जाएगा। बात खत्म हो जाएगी। जैसे ही बाहर का मिटा, ऐसे ही खोजने वाला भी तो मिट जाएगा। तो बात ही खत्म। खोजते-खोजते, खोजने के लिए जब कुछ नहीं बचता, तो खोज ही बचती है। बात खत्म हो जाती है। वही अहम भाव खत्म गया। और उसमें सब, मेरा-तेरा, राग-द्वेष, मोह, शक्ति, इच्छा, अपेक्षा, सब खत्म हो गया। तो बचा कौन? सत्य। बस बात ही खत्म हो गई। तो ज्ञान ही बचेगा। और बचेगा क्या? शेष क्या बचेगा? ज्ञान बचेगा।
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