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प्रश्नोत्तर P5-0118 · भाग 5

मन पर नियंत्रण कैसे हो?

जरूरत ही नहीं है। मन आपके लिए काम ही नहीं करता। नियंत्रण कैसे करो। मन तो शरीर के लिए काम करता है। भूख लगी, भोजन पर गया। आप रोक लो? नहीं। भोजन कर लो। भोजन पर ले जाओ। नहीं जाएगा। अब आप कहो कि मैं इस रोएँ पर नियंत्रण कैसे करूं। यह रोआँ, आप कुछ नहीं कर सकते। हाथ आप हिला सकते हो, रोआँ नहीं हिला सकते। रोआँ हाथ के लिए काम करता है। हाथ इस शरीर के लिए काम करता है। और यह हाथ से भोजन खाया जाता है, इसलिए हाथ काम करता है। मतलब जितने भी अंग काम करते हैं आपके, जो हिलाने से हिलते हैं, वह इस शरीर की जरूरत है। और इस शरीर की जरूरत आपको है। इसका उपयोग आप अच्छे तरीके से करें। उतने अंग पर आपका बस है। कंट्रोल आपका पलक पर है, लेकिन इस पलक के रोएँ पर नहीं। इस बात को समझना। अब तुम कहो कि नहीं, मैं कंट्रोल करूंगा। एक रोआँ हिला आऊंगा। पूरी जिंदगी हिलाते रहो। हिला भी लोगे तो क्या हो जाएगा? आप जितने भी मन को रोकने का काम कर रहे हो, यह रोआँ हिलाने के बराबर है। मैं कह रहा हूं, हिल भी जाएगा तो क्या कर लोगे। आप एक अपना बाल हिलाओ। हिलेगा क्या? शरीर में इतने बाल हैं। हिलेगा? जरा इस बात को समझिए। अब यही देख लीजिए। आप ना लाओ, नहीं। लेकिन हिलाओ, हिलेगा, क्योंकि यह खाओगे तो हिलेगा। इसलिए समझो, हर अंग का कोई मतलब है। अगर वह हिल रहा है तो उसके पीछे भी कुछ काम कर रहा है। नहीं तो नहीं हिलता। वह जरूरत के लिए बनाया गया है। आप बेमतलब का उसे रोक रहे हो। अब रोएँ से कोई ना आपको लाभ होगा, ना हानि होगी। वह शरीर के लिए काम कर रहा है। इस हाथ के लिए काम कर रहा है। आप इस पर कंट्रोल नहीं कर सकते। अगर आप इस पर कंट्रोल करने लगो तो आप भटक जाओगे। इस बात को समझिए। अब आंख पर पलक है। इसका कंट्रोल आपके हाथ में नहीं है। यह आंख के लिए काम करता है। और देखो, वह अपने आप काम करता है। कुछ देर आप इसे रोको, या अपने तरीके से हिलाओ। आप घबरा जाओगे। करके देखिए। कुछ देर आप ऐसे इसे हिलाओ। देखो, यहां सब अपने आप काम कर रहा है। बेमतलब का परेशान। बेमतलब जिंदगी मिली थी जीने के लिए। क्या आपने अपने तरीके से चलाने के चक्कर में बर्बाद कर दिया। आप मालिक बनना चाहे, कि मैं जैसा चाहूं ऐसा रोआँ हिले। नहीं, कुछ नहीं होगा। ऐसे हिलाते रहो। मन शरीर के लिए काम करता है, आपके लिए नहीं करता। आप इस बात को समझिए। आप बेमतलब का परेशान। अब कोई बोले कि मैं नाक को हिलाना चाहता हूं। तो यह पालन नहीं। नाक अपना काम कर रहा है। सब यहां अंग अपना-अपना काम कर रहे हैं। वैसे मन अपना काम कर रहा है। आपको क्या करना है, वह देखो। जिंदगी जीने के लिए मिली है। आप बेमतलब अंगों को रोक रहे हो। अब कोई बोले कि नहीं, इस पलक के रोएँ को मुझे अपने तरीके से हिलाना-डुलाना है। जिंदगी भर कर पाएगा क्या? अच्छा कर लिया तो क्या होगा? मैं बता रहा हूं क्या होगा। अगर आप शरीर का रोआँ या बाल हिला दिए, कि भाई चल, ऊपर खड़ा हो जा। खड़ा हो गया। अच्छा, इससे क्या हुआ? कुछ नहीं। मैं कह रहा हूं, आपके कहने से, इशारे से नाचने भी लगे। खड़ा हो जा, खड़ा हो जा। गिर जा, गिर जा। अच्छा, क्या हुआ? क्या मिला? बस यही है। आप यही कर रहे हो। मतलब वह काम कर रहे हो जिससे आपको लाभ भी नहीं है। वैसे जिंदगी में आपने पाल के रखा है मान की इच्छा, दिखावा, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा, बड़ा-छोटा बनने की इच्छा। इन चारों से लाभ नहीं है। लेकिन नहीं, पाल के रखे हो। इसी से तो मैं खड़ा हूं। इसको तो मैं जाने नहीं दूंगा। चार को हटा दो तो आप खत्म। पूरी जिंदगी चारों के चक्कर में। ये चार को छोड़ दो। अगर आपने चार की इच्छा छोड़ दी, तो छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड, आप कर भी नहीं पाओगे। यह चार के लिए आपको करना पड़ता है। और ये चार छोड़ भी नहीं रहे, और किसी से कह भी नहीं सकते। आप किसी से खुल के, माइक पर बोल नहीं सकते, कैमरे के सामने, कि मैं इसके लिए जीता हूं। शर्म आएगी। अपने परिवार तक से नहीं कह सकते। मतलब इसको हर व्यक्ति घुमा-फिरा के पाल के रखा है। लेकिन किसी से नहीं कह सकता। ये चारों तो आपके हाथ में हैं। छोड़ क्यों नहीं रहे। तो फिर वही। अच्छा, इसके लिए साधना की क्या जरूरत है? यह छोड़ने के लिए कोई साधना की जरूरत है? लेकिन नहीं। यह नहीं छोडूंगा, और साधना करूंगा। यह नहीं छोडूंगा, और साधना करता रहूंगा। फिर ऐसे भटकते रह जाओ। संत ने कहा था। एक-दो संत की बात हो रही थी। तो उन्होंने कहा, तुम कौन सी सिद्धि प्राप्त कर। तुम कौन। पानी पर चलना। हां, बस वही, पानी पर चल देते हैं। वो बस बोले, इसके लिए कितने साल लगाए? बोले, इसके लिए मैंने बीस साल लगा लिए। तो दूसरे संत नाव में बैठते हैं, और जाके गंगा जी के पार हो जाते, और नाव वाले को बीस रुपये देते। बोले, मैंने सिद्धि के बीस साल लगाए। तब बताओ, कोई मतलब नहीं है। अच्छा, इससे मतलब भी क्या है? मैं बोला, इससे क्या फायदा है? लाभ समाज को, और आपको क्या? अहंकार को। कुछ नहीं। बस और क्या। अच्छा, लाभ तो। ऐसे हिलाते रहो। मतलब बेमतलब का हम काम कर रहे हैं। बेमतलब का, जिसका कोई मतलब ही नहीं है जीवन में। तब भी हम काम कर रहे हैं। अपने जीवन में भी हो रहा है। सामाजिक जीवन में बहुत हो रहा है। चार को छोड़ दो। बात खत्म। अब आपको जवाब मिल गया होगा। ये चारों को छोड़ दो। यह तो आपके ऊपर है करना। जब बोलचाल करें, लेन-देन करें, उसमें ध्यान रखें।

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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? · 2024-12-31