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प्रश्नोत्तर P5-0120 · भाग 5

ध्यान में धारणा किसकी? ईमानदारी विस्तृत में क्या है?

निर्विकार होने की। राग-द्वेष से मुक्त होने की। बेईमानी करना बंद कर दो। कर्म करते हो, बस इतना ध्यान रखो कि छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड ना हो। और इससे भी गहराई में जाना है, तो बस आप मान की इच्छा, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा, दिखावा, और बड़ा-छोटा बनने की इच्छा का त्याग कर दो। आप बेईमानी कर भी नहीं पाओगे। कर ही नहीं पाएगा। अगर आप ये चार चीजों का त्याग कर दो जीवन से, तो आप कर भी नहीं पाओगे। और यह त्याग नहीं किया, तो फिर आपको बेईमानी करनी ही पड़ेगी, चाहे कुछ भी हो जाए। गाड़ी लेके आ गया। चार को दिखाने का मन करता है। वह दिखावा आगे आता है, अंदर से आता है। वह खत्म करना पड़ेगा। नहीं, जरूरत भी हो सकती है। जरूरत भी हो सकती है। वह जरूरी नहीं। अगर हम अच्छे कपड़े पहन रहे हैं, अच्छी गाड़ी का उपयोग करें, अच्छे मकान का उपयोग करें, हमारी जरूरत भी हो सकती है। आखिर हमारे पास वैभव तो रखेंगे क्या। मन में आ गया, मैं दिखाऊं। अब वह आपके ऊपर है, कि आप अपनी जरूरत के लिए लिए हैं, कि आप दिखाने के लिए लिए हैं। वह आपके ऊपर है। वह आपको देखना है, कि मैं किसी और को नीचा दिखाने के लिए इसका उपयोग कर रहा हूं, या मैं इसका उपयोग अपनी मस्ती के लिए कर रहा हूं। बस यह आपको देखना है। यही कंडीशन है। ये चारों में अप्लाई होता है। राम भगवान आए, कृष्ण भगवान आए। उन्होंने भी तो बोलते हैं, लग्जरी से लग्जरी लाइफ जी के गए। नहीं। पूरा वीवीआईपी, वीआईपी, वही सब। है उनके आगे। उन्होंने क्या नहीं उपयोग किया अपने जीवन में। पांच प्रकार का माल खाया। लेकिन ईमानदारी से जिए। क्या नहीं किया उन्होंने। विवाह नहीं किया? बच्चे नहीं पैदा किए? सब कुछ किया। राजा नहीं बने? क्या नहीं किया। ईमानदारी से किया। बस यही बात है। ईमानदारी से किया। ये चार चीजें लोग बेईमानी से करना चाहते हैं। करना है, लेकिन करते बेईमानी से हैं। तो आप ईमानदारी से करो। आप बिजनेस कर रहे हो तो बिजनेस को बिजनेस के तरीके से करो। व्यवहार मत करो। बिजनेस में व्यवहार नहीं होना चाहिए। आप बिजनेस में व्यवहार क्यों कर रहे हो। बिजनेस को, काम को काम के तरीके से काम करो। और आप दिए हो तो लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। यह थोड़ा प्रैक्टिकल बात हो गया। आप व्यापार में व्यवहार क्यों कर रहे हो। आप कोई काम कर रहे हो तो काम के तरीके से काम को करो। काम में व्यवहार क्यों। आपको क्षमता जितनी है, उतना दो। थोड़ा जागृत होना पड़ेगा। महाभारत में क्या सिखाया भगवान कृष्ण ने। न तो किसी का छीनो, न तो कोई छीने तो बर्दाश्त करो। यही धर्म कहता है। सारा सार उसी में आता है। और काम को काम के तरीके से करो। काम में व्यवहार क्यों। मोह में देते हैं ना, तो फिर वही तो गलती है। मेरा है। हां, तो बस वही परिणाम भोगो। फिर अगर आप काम को काम के तरीके से करोगे तो कभी फंस नहीं सकते। और काम को जब अपने तरीके से करते हो, तब आपको फंसना ही फंसना है। फसोगे ही।

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