प्रश्नोत्तर P6-0033 · भाग 6
कोशों से आनंद तक — मुझे निकलना है फंसा हूं छूटना है — आनंद में क्या?
वहाँ पहुँचोगे तब पता चलेगा। भटक रही हो तो मतलब वही है। शून्य से ऊपर जो है, पहले वहाँ पहुँचो। कोशिश तो करो। ऐसे समझते रहो। पहले निकलने के लिए प्रयास करो।
और मूल राग-द्वेष क्या? जब बैठो तो देखो कि विचारों में राग-द्वेष नहीं है क्या। देखो, आपके अतीत में ना राग-द्वेष हो, और आपकी माँग ना हो। क्या इस जगह आप हो गए हो? तब तो बातें खत्म हो जाएँगी। तो ये काम करो।
पूर्ण समर्पण कैसे होगा? विश्वास। जब आप कुछ नहीं चाहिए, इस स्थिति में आ जाओगे, इसी को पूर्ण समर्पण कहते हैं। जब इस स्थिति में आप आ जाओगे, कुछ नहीं चाहिए, तब ये पूर्ण समर्पण है।
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