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प्रश्नोत्तर P6-0052 · भाग 6

प्रश्न पूछते पूछते जब उत्तर मिल चुके तो ध्यान एक पत्ते पर चला गया। हाथ पत्ता छूने लगा। लगा कि प्रकृति ने यह उदाहरण खुद खड़ा कर दिया, नहीं तो यह समझ पैदा ही नहीं होती। उस समय विचार नहीं उठा, आंख ने देखा और हाथ उधर चला गया। प्रतिदिन खाना खाते समय भी हाथ का निवाला अपने आप मुंह तक चला जाता है, शरीर से अपने आप। क्या बिना विचार के यह क्रिया हो जाती है?

पत्ते को हाथ में मत लो। देखो क्या कर रहे हो। अब प्रश्न पूछने की क्षमता नहीं रह गई, तो अपने आप को वहां लगाकर कुछ ना कुछ बोलना है। उसे क्यों छुए। प्रश्न की बात चली गई नहीं है। उस अवस्था में मुझे क्यों नहीं देख रहे। प्रश्न की कीमत है तो ध्यान वहां कैसे चला गया। हाथ लगाया, तो उसमें प्रश्न नहीं उठा? नहीं, उसमें ताकत लग गई। मन उधर हो गया, ऊर्जा वहां लग गई। बिना विचार पत्ता उठ ही नहीं सकता। चटाई क्यों नहीं उठा ली, अगर बिना विचार उठ जाता? विचार आया था। मेरी बात समझोगे, या खुद बताओगे? पहले मेरी बात समझो। प्रश्न पूछते पूछते उत्तर मिलते गए, समझ आने लगी। अब क्या पूछूं। ऊर्जा सीधी मेरी तरफ नहीं लग पा रही। पत्ते पहले भी थे, पता नहीं कितने पत्ते उड़ गए। ऊर्जा मेरे पर नहीं लगी तो गई कहां। पत्ते में कुछ लग गई, मुझमें कुछ लगेगी। ऊर्जा बंट रही है। शुरुआत में ऊर्जा एक ही जगह थी। अब विचलित हो रहे हो, ऊर्जा बंट रही है, संभाल नहीं पा रहे। मुझ पर केंद्रित नहीं हो पा रहे। केंद्र तभी तक था जब तक व्यक्तिगत प्रश्न थे। तब कुछ और दिखता नहीं था। कोई बोल भी रहा होता तो मन करता चुप हो जाए। व्यक्तिगत प्रश्न हटते ही खुद विचलित हो गए। कुछ और पूछना है, पूछने को बचा नहीं, जितना पूछना था उसका जवाब मिल चुका। फिर भी कुछ और पूछना है, और ऊर्जा सीधे मुझ पर नहीं लग रही। ऊर्जा बांट दी। पत्ता दिख गया। हाथ में पत्ता लेते हो, तोड़ते हो, तोड़ने में लगते हो, मुझसे कुछ ना कुछ पूछते हो। एक बार में एक ही काम करो। लक्ष्य तक पहुंचना है तो लक्ष्य से विचलित मत होओ। यहां मुझसे प्रश्न करने बैठे हो, पत्ता तोड़ने नहीं। पत्ता तोड़ने का तुम्हारे जीवन में कोई उद्देश्य है क्या। अब यह मिल गया, अब यह गलती मत करना। एक समय में मन एक है, दो नहीं। पूरी तरह लगता है तो एक ही जगह लगता है। इंद्रियों से उसे अनेक जगह उलझा दिया। कई जगह ऊर्जा लगा रहे हो, काम नहीं कर पा रहे। एक ही जगह लगो। देखो सच में जरूरी क्या है। ऐसी गलती फिर मत करना। कहते हो उस समय विचार नहीं उठा, आंख ने क्रिया की, हाथ उधर गया। हाथ ऐसे जा ही नहीं सकता। आंख ने देखा, फिर हाथ गया। तेरी ईमानदारी या बेईमानी से मुझे लेना देना नहीं। तू मेरे लिए कोई कर्म नहीं कर रहा, तो तेरी ईमानदारी सिद्ध करने की यहां जरूरत नहीं। अपने आप को यह मत कहो कि मैं ईमानदार हूं या बेईमान। समझने के लिए पूछो। दृष्टि गई, फिर विचार आया कि उठा लूं। यह सूक्ष्म विचार है। विचार नहीं आया हो तो उठा ही नहीं सकते, असंभव है। इस पर चिंतन करो। जब तक उठाने का आदेश नहीं देंगे, तब तक उठ नहीं सकता। बातचीत मत करो, इस पर चिंतन करो। विचार का आदेश दिए बिना हाथ क्रिया करता ही नहीं। प्रतिदिन भी ऐसा ही होता है। बिना विचार आए उठा ही नहीं सकते। खाना खाते समय निवाला अपने आप मुंह तक जाता है, ऐसा नहीं। नाक में क्यों नहीं जाता? पता है कि भूख यहीं से मिटेगी, इसलिए उठाकर यहीं डालता हूं। ज्यादा बातचीत मत करो। इसका उत्तर पहले भी आ गया था। मेरे पास इतना समय नहीं। समय बर्बाद मत करो। अब तुम हट रहे हो। जितना कहा गया है उस पर चिंतन करो। आगे प्रश्न हो और जीवन में मौका मिले तो पूछना। अब बातचीत हो जाएगी। मेरे पास इतना समय नहीं कि तुमसे बातचीत करूं। इतना समय है कि तुम अपना आत्मिक कल्याण कर लो। मैं समय तुम्हारे लिए वहीं तक लगाऊंगा, बातचीत में नहीं। बातचीत में तुम्हारा भी समय जाएगा, मेरा भी। जिंदगी ने मिलने का एक मौका दिया है, कुछ शब्द दिए हैं, उतना समय दिया है। फिर तुम कहीं और, मैं कहीं। समय का सदुपयोग करो। मैंने कहा विचार आया तभी पत्ता उठा, तुम कहते हो विचार नहीं आया। इस पर गहरा चिंतन करो। तुम्हारी बात मेरी बात काट रही है। जिससे सीखने आए हो, उसकी बात को अगर तुम्हारी बात काट दे, तो मैं सिखाने लायक नहीं रहता। इस बात को समझो। बहुत गहरा चिंतन करना। वह कह रहे थे विचार आया तभी उठा, और मैं कह रहा हूं विचार नहीं आया। अगर मैं इतना सूक्ष्म देख पाया और वे नहीं, तो मैं उनसे आगे था। मेरी सूक्ष्म बुद्धि हुई, मैं भूल से वहां चला गया, दोबारा नहीं जाऊंगा। तुम्हारी बात और हमारी बात एक दूसरे को काट रही हैं। पहुंच नहीं हुई हो तो सुनो। मेरी बात सुनो। अब बोलो मत। बोलने से मतलब नहीं होगा। जब तक जवाब नहीं मिलता, चिंतन करो। अगर निश्चय हो जाए कि बिना विचार उठ गया, तो तुम मुझसे आगे हो, कोई और खोजो। अगर पता चले कि विचार आया था तभी उठा, मेरी बात सही है, तो मैं तुम्हारे काम का हूं। इस पर चिंतन करो। यह जवाब तुम्हारे लिए जरूरी है। अब आगे किसी और का प्रश्न हो तो वह पूछे। तुम्हारी और मेरी बात एक दूसरे को काट रही है। तुम्हारी बात सही हो तो तुम्हारा स्तर मुझसे ज्यादा है, आगे बढ़ो। मेरी सही हो और तुम्हारी काट रही हो, तो आगे का मार्ग पूछना। पहले इस पर चिंतन। इसका जवाब दोगे तो उस समय पूछूंगा, कैसे। वह जवाब भी तुम्हें ही देना पड़ेगा। फिर चिंतन, फिर आगे की बात।

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वीडियो: Sunday Q&A May 3, 2026 #Yogi · 2026-05-03