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प्रश्नोत्तर P6-0168 · भाग 6

यहाँ आते ही दो गलतियाँ हो गईं। उज्जैन का रिजर्वेशन घूस देकर, ढाई तीन हजार एक्स्ट्रा देकर कराया, क्योंकि उज्जैन के आगे इंदौर है यह मालूम नहीं था। फिर टीटी को पाँच सौ रुपये देकर इंदौर तक बिना स्लिप के बैठा लिया। स्लिप का किराया लगभग ग्यारह सौ था। रास्ते भर पछतावा रहा। इसका क्या करें?

टीटी को पाँच सौ क्यों दिए? स्लिप क्यों नहीं ली? ग्यारह सौ कुछ रुपये लग रहे थे तो ग्यारह सौ देते। वह सरकार के खाते में जाता। यह गलती हुई। तुम्हारे पास कमी भी नहीं है। इतनी कमी नहीं है। फिर क्यों नहीं दिए। बाद में महसूस किया कि गलती हो गई। रिजर्वेशन कराने में एक्स्ट्रा पैसे दिए, वहाँ भी घूस दी, और दूसरी गलती यहाँ कर दी। दो गलतियाँ। पवित्र जगह जा रहे हो और दो गलतियाँ हो गईं। अब यहाँ से यह नहीं करना। रास्ते भर पछतावा होता रहा कि पाँच सौ छह सौ में अपने को इतना नीचे गिरा लिया। कोई जरूरत ही नहीं थी। पाँच हजार भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं है। कोई बड़ी बात नहीं। फिर भी कि पाँच सौ बच जाएँगे। बेईमानी करके पाँच छह सौ बच जाएँगे। बचाकर क्या करोगे। और पश्चाताप रास्ते पर किया। यही तो होता है हमारे साथ। अब मत करो।

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