प्रश्नोत्तर P7-0022 · भाग 7
हम खुद से ही जो बेईमानी करते हैं उसका क्या उपाय करें? अंदर की नकारात्मक ऊर्जा कैसे हटे? क्या बिना दूसरे को धोखा दिए अपने आप को धोखा दे सकते हैं?
दूसरों से पहले करना बंद कर दो।
नकारात्मक वाला काम बंद कर दो। बस बात खत्म।
अच्छा, एक बात बताइए। खुद को कैसे धोखा देते हो? बताओ। क्या आपको लगता है, बिना दूसरे को धोखा दिए अपने आप को धोखा दे सकते हो? मेरा के बिना आप स्वयं को कैसे धोखा दे सकते हो? बताइए कैसे। दूसरा है ही नहीं, तो तुम तो हो ही नहीं। धोखा किसको दोगे? धोखा दो में होता है। एक में तो धोखा हो ही नहीं सकता। कैसे बताइए। सिद्ध करिए। एक में धोखा कैसे हो। धोखा तो कभी भी होगा तो दो में होगा। एक में तो हो ही नहीं सकता। इस पर बात करना बहुत जरूरी है।
आप अपने आप को धोखा कैसे दे सकते हो? यही तो मैं पूछ रहा हूँ। आप अकेले धोखा कैसे दोगे? धोखा के लिए तो दो चाहिए। एक में तो धोखा हो ही नहीं सकता। हो सकता है क्या? बिना दूसरे को धोखा दिए खुद को नहीं दे सकते। मैं आपसे यह पूछ रहा हूँ कि एक में धोखा हो सकता है क्या। धोखा तो तब हो सकता है जब दूसरा मौजूद हो। तो आप दूसरों को धोखा दे रहे हो। अपने आपको कभी धोखा नहीं दे सकते। आदत है। तुम माल खा रहे हो, उसकी भरपाई कर रहे हो। धोखा नहीं खा रहे हो। माल खा रहे हो, रसपान कर रहे हो, उसकी भरपाई कर रहे हो। बात को समझो, जरा बहुत गहराई से समझो। तुम धोखा नहीं खा रहे। तुम माल खा रहे हो, और उसका बिल चुका रहे हो। बस।
एक आदमी बैठा-बैठा माला जप रहा है। क्या कर रहा है? माला तो है। माला तो दो हो गई। माला तो स्वयं नहीं है। माया तो स्वयं नहीं है। मैं कह रहा हूँ, स्वयं को धोखा कैसे दे सकता है। मैं आपसे यह पूछ रहा हूँ, बिना दूसरे को धोखा दिए।
आराम से सोचिए। क्योंकि मुझे कहीं नहीं जाना है, और आपको भी कहीं नहीं जाना है। अभी बताइए। भ्रम टूटना चाहिए। मेन बात यह है। नहीं टूटेगा तो फिर यही कहते रहेंगे। जो ऐसा लगता है, इसका जो दूसरापन है, वह जरूरी है। इसलिए तो हमने कहा, आज बात कर लेते हैं।
स्वयं को धोखा देने के लिए स्वयं को कभी धोखा दे ही नहीं सकता। जब भी धोखा देगा, दूसरे को देगा। वह भी रसपान के चक्कर में। फिर रसपान का बिल पड़ेगा। बिल भरना पड़ेगा ना। बात समझ में आ गई? क्योंकि इसको भी लोग लेकर ढो रहे थे। हमने कहा, आज इसको साफ करो। आप लोग भी ढो रहे होंगे। एक व्यक्ति दूसरे को धोखा दे रहा है और समझ यह रहा है। तो कोई जानता ही नहीं है। इसको क्या कहेंगे। वह तो जानता है। धोखा तो तब होता जब वह भी नहीं जानता। वह तो जानता है ना। पूरी समझ के साथ कर रहा है। तो धोखा कहाँ हुआ। धोखा तो तब होता है जब वह नहीं जानता। वह तो जान रहा है। कोई जाने या ना जाने, वह तो जानता है। धोखा भी समझता है, जान के साथ कर रहा है। धोखा उसके साथ कर रहा है, अपने साथ नहीं। दूसरे के साथ, रसपान के चक्कर में। और फिर रसपान का बिल भर रहा है।
बस। व्यक्ति अपने आप को कभी धोखा नहीं दे सकता। यह समझ लेना। जब भी वह धोखा देगा तो किसी और को। फिर वह धोखे का बिल भरेगा।
आदत तो आदत। कल से छोड़ूँगा, कल से छोड़ूँगा। आदत किसी और में है ना? नहीं। मैं गुटखा खा रहा हूँ। हाँ तो मत खाओ ना। वह खुद का धोखा नहीं। उसे पता है। उसे पता है मुझे नुकसान करेगा। बात समझ गए? उसे पता है। और पता नहीं, फिर धोखा भी नहीं है। खा रहा है। समझना। व्यक्ति कभी अपने आप को धोखा नहीं दे सकता। जब भी धोखा देगा, किसी और को। वह भी रसपान के चक्कर में। बात समझ में आ गई? कोई संशय हो तो बोलना।
पीने वाला तो देख रहा है कि मैं पी रहा हूँ। धोखा तो तब होता जब बीड़ी डाले और पता ही नहीं चले कि मैं बीड़ी पी रहा हूँ कि नहीं। और अगर पता नहीं होता, फिर धोखा भी नहीं होता। घुमा-फिरा के, धोखा अपने आप को नहीं दिया जा सकता।
यह कहा कि आज के बाद हम यह नहीं करेंगे। और वही व्यक्ति दस मिनट के बाद, जब कंपनी में है, वही कर रहा है। तो दोनों में वह है ना। एक में नहीं बोला, एक में हाँ कर रहा है, ऐसा नहीं। दोनों में वह है। वह भोग रहा है। भोगता बोल सकते हैं। उसे भोग कह सकते हैं। लेकिन धोखा नहीं बोल सकते। फल जाएगा। जैसे सज मिलेगा, फल मिलेगा। वह तो देख रहा है। दूसरे से बोला। अगर दूसरा ईमानदार है तो उसे सजा मिलेगी। दूसरा भी वैसा है तो नहीं मिलेगी। बहुत कुछ है। लेकिन बात समझ में आ गई। साफ करना बहुत जरूरी था।
जेब में पैसा होने के बावजूद मना करूँ, तो सामने वाले के लिए वचन सत्य हो गया। उसे पता नहीं कि हमारे पास है कि नहीं। लेकिन मुझे पता है कि मेरे पास है। उसे भी पता है तुम्हारे पास है, तभी माँगने आया था। भले ही तुम नहीं दे रहे हो, यह भी पता है। यह बात भी सही है। लेकिन कोई अनजाना हो, हर किसी की स्थिति लगभग पता चल जाती है। इस स्थिति में वह अपने आप को धोखा नहीं दे रहा। मेरे जेब में पैसा होने के बावजूद मैं मना करूँ। सामने वाले के लिए तो वह वचन सत्य हो गया। हाँ, तो धोखा दो में दिया ना। पहले उसको दिया, बाद में अपने आपको। फिर पात्रता तो भी होगी ना। सबको ऐसे नहीं। उसको नहीं दिया इसलिए कि उसकी योग्यता नहीं। कल यही मैंने बताया था। समझ में आया यह बात? इसलिए मैंने कहा, इसे अंतिम कर लो। बात सही है। अब तो समझ में आएगा। अब तो नहीं बोलोगे ना। बात यह है।
बहुत कुछ हम ढो रहे हैं। धीरे-धीरे आप सुनो, समझ में आएगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13