प्रश्नोत्तर P7-0028 · भाग 7
आप कहते हो जरूरत में जियो, फिर लघुशंका होने पर सत्संग में रोकने की बात क्यों करते हो? यह स्वास्थ्य के लिए सही नहीं। इस शंका को दूर करें।
लोगों को पहले ही कह दिया गया है, भैया सत्संग के पहले मूत्र त्याग कर लो। एक-एक मिनट पर आए तो डब्बा दे दें क्या। हमें भी तो लगती है। हम भी तो इंसान हैं। सब कार्य छोड़ के भोजन, भोजन भी छोड़ के सत्संग। पता है आपको। यह जरूरत नहीं। अज्ञानता क्या है। यह जरूरत नहीं। हम कुछ चीजों को रोक सकते हैं क्या। हम सत्संग में बैठते हैं तो घंटों तक रोक लेते हैं। आप समझ रहे हो, यह तो सामान्य अनुशासन है।
कहने का मतलब यह है। अब आदमी अगर एक-एक घंटे पर पेशाब कर रहा है, तब तो उसको हॉस्पिटल की जरूरत है, सत्संग की नहीं। साधक अगर एक बार बाथरूम कर लिया, तो दो-चार घंटे नहीं जाएगा। एक-एक घंटे में बाथरूम जाएगा, तो उसकी अज्ञानता है कि सत्संग के पहले वह क्यों नहीं गया। यह उसकी अज्ञानता है। सत्संग के पहले चला जाता है, मल-मूत्र का त्याग करके फिर बैठता है। फिर दो-चार घंटे तो बैठ ही सकता है। और नहीं बैठ सकता तो फिर उसे हॉस्पिटल की जरूरत है। वह साधक नहीं है तब। वह यहाँ टाइम पास करने आया है। बात समझ रहे हो।
अस्सी साल के हैं, अस्सी के ऊपर उम्र है। बताइए। इनसे तो वह जवान है। तब यह जरूरत नहीं है। अज्ञानता है। प्रेम में, भक्ति में, सत्संग में कभी उठना नहीं चाहिए। तो मेरे को बताओ, उनको है क्या। आपको है। चश्मे वाले को है, उनको नहीं। प्रेम में, भक्ति में, सत्संग में उठना नहीं चाहिए। अगर बैठ गए। अब तुम प्रेम में बैठ गए, कमरे में बोल रहे हो। जैसे ही मूड बना, तुम कह रहे, बाथरूम करके आता हूँ। फिर क्या होगा। समझने वाली बात है। और तुमको इसकी जरूरत है तो बोलो इसकी जरूरत है। शादी क्यों की, जब देखें तेरे को बाथरूम में लगी रहती है।
कहने का मतलब है, आप देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में समझ के जियो। अगर आप सत्संग में बैठ रहे हो तो पहले मल-मूत्र का पूरी तरह त्याग कर दीजिए, और फिर बैठिए। कोई आपातकालीन घटना हो जाए, बात अलग है। यह समझने वाली बात है। सब काम छोड़ के भोजन, भोजन भी छोड़ के सत्संग।
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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13