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प्रश्नोत्तर P7-0108 · भाग 7

पुखराज सिंह कहते हैं, महाराज जी, आप इतनी बारीकी से समझा रहे हैं, मैं मूर्ख हूं, समझ नहीं पा रहा। क्या करूं?

समझ रहे हो। तभी तो पता चला कि इतनी बारीकी से समझा रहे हो। बस इसे आचरण में उतारो।

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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03