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प्रश्नोत्तर P7-0111 · भाग 7

कार्तिक पूछते हैं, गुरु जी, सत्कर्म में समर्पण करने पर निकलना है, यह भाव भूल जाता हूं। क्या करूं?

कोई बात नहीं। याद तो आ जाती है। काम तो कर रहे हो। पता चल रहा है कि काम कर रहे हो। आपने पानी पिया तो प्यास बुझ ही जाएगी। याद नहीं रहा, तो यह थोड़ी है कि प्यास नहीं बुझाएंगे। पानी पी लिया तो प्यास बुझ ही जाएगी। याद रहने से क्या होगा? वैसे ही निकलने के लिए ईमानदारी और सत्कर्म अपना लो। निकलना भूल भी जाओगे तो भी निकल जाओगे, क्योंकि ऐसा कर्म अपना लिया। और मैं यह कह रहा हूं, निकलना याद भी रहे, पर ईमानदारी और सत्कर्म न अपनाकर बेईमानी और दुष्कर्म अपना लिया, और केवल निकलना याद रखा, तो क्या कभी निकल पाओगे? कभी नहीं निकल पाओगे। बंधन वाला काम कर रहे हो, तो निकलने वाला काम करना पड़ेगा।

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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03