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प्रश्नोत्तर P7-0152 · भाग 7

अहम भाव को पूरी तरह कैसे खत्म करें? आपने कहा था कि दूसरों से अपने हिसाब से काम लेने की उम्मीद छोड़ दो, उससे आधी समस्या हल हुई। पूरी तरह अहम कैसे मिटे? काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह में काम किसे कहते हैं, कामना को या वासना को? मोह और लोभ किस स्थिति में होते हैं? इन्हीं दो पर सबसे ज्यादा संदेह रहता है।

काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह। काम का मतलब सिर्फ शरीर का संबंध नहीं है। काम का मतलब होता है कोई भी कार्य। लोगों ने काम का मतलब बस शरीर के काम को दे दिया है। लेकिन ऐसा नहीं है। काम का मतलब कोई भी काम है। मेरे द्वारा कुछ भी हो रहा हो, अपनी कामना पूरी करने के लिए, या किसी और की कामना पूरी करने के लिए, या किसी और की इच्छा पूरी करने के लिए, उसे काम कहा गया है। फंसते हम तब हैं, जब हम अपने तरीके से करते हैं। अगर हम कोई भी काम ईमानदारी से, उचित तरीके से करें, तो हम कभी फंस नहीं सकते। हमारे द्वारा कोई भी कार्य हो, चाहे वह संबंधी के साथ क्यों ना हो। अगर हम सामने वाले के विरोध में कर रहे हैं, तो पाप है। चाहे वह खुद की स्त्री क्यों ना हो। यह बहुत सूक्ष्म बात है। अगर हम जबरदस्ती किसी के साथ करते हैं, उसकी भावनाओं को मानसिक पीड़ा दे रहे हैं, तो वह गलत है। वह भी एक बेईमानी है। और अगर उसकी सहमति से कर रहे हैं, उसमें हम बेईमान नहीं हैं, तो दोष नहीं है। इसलिए राम ने भी शादी की, तो बच्चे पैदा हुए। कृष्ण ने भी किया। गुरु नानक के भी दो लड़के थे। कितने महापुरुष हुए। लोगों ने क्या किया? काम इसी को पकड़ लिया, और इसी को सबसे गलत ठहरा दिया। लोगों के दिमाग में यह डाल दिया है कि यही सबसे गलत है, और लोगों की मानसिकता बन गई है। लेकिन ऐसा नहीं है। आप अगर छीन के किसी का भोजन भी कर रहे हो, तो वह भी पाप है। निस्संदेह। आप कोई भी काम ईमानदारी से करो। बस। कोई भी काम। अहम तब उठता है, जब लगता है कि मेरे विरोध में कोई जा रहा है। ऐसे नहीं उठेगा। जब मुझे लगेगा कि मेरे तरीके से नहीं हुआ, मेरे विरोध में कोई जा रहा है, तब अहम अहंकार का रूप ले लेता है। अहंकार कब होता है? जब हम किसी को दबाते हैं। मद मतलब अहंकार। क्रोध अलग है। क्रोध अहम नहीं है। यह मत समझना कि आप किसी पर गुस्सा करते हो तो अहम है। नहीं। उसके पीछे आपका भाव क्या है, वही मुख्य है। अगर क्रोध आप सामने वाले के हित के लिए कर रहे हो, तब तो उसका भी स्तर उठेगा, आपका भी उठेगा। और अगर आपने क्रोध उसे दबाने के लिए किया, तो वह क्रोध अहम बन गया। तो किसी को दबाने के लिए कभी भी गुस्सा मत करना। दबाने के लिए गुस्सा कभी नहीं। यह तो क्रोध वाला एक पहलू हो गया। दोनों स्थिति में क्रोध ही दिखता है। अहम करोगे तो भी क्रोध दिखेगा, और क्रोध करोगे तो भी क्रोध दिखेगा। इसलिए गहराई से समझो। मद, लोभ, मोह जब हटेंगे, तो आपको आत्म का ज्ञान होगा, मतलब खुद का ज्ञान होगा। और जब आपके अंदर से काम और क्रोध पूरी तरह हट जाएंगे, तो ब्रह्म का ज्ञान होगा। मैंने कहा था, तब से मेरे मद, लोभ और मोह, ये तीन हट गए। दो अभी भी मेरे अंदर बाकी हैं, काम और क्रोध। हमें लगता है कि हम परे हो गए। जिस दिन परे हो जाएंगे, अवधूत स्थिति बन जाएगी। जब ये तीन हटेंगे, तो आत्म का ज्ञान होगा। और जब ये दो हट जाएंगे, तो ब्रह्म का ज्ञान होगा। आपको पहले मद, लोभ और मोह, इन तीन से छुटकारा पाना है। मोह हमें तब होता है, जब हमारे तरीके से कोई हमें देता है, और मैं उस लायक नहीं रहता। ध्यान से रखना। योग्यता से बाहर, जब भी योग्यता से ज्यादा मिलेगा, और आपने ले लिया, तो उस व्यक्ति का एहसान हो जाएगा, और उससे मोह हो जाएगा। तो योग्यता से ज्यादा लो ही मत। तब आप मोह के जाल में नहीं फंस पाओगे। जैसे ही आपने योग्यता से ज्यादा लिया, और आपको पता है, वैसे ही आप मोह के जाल में फंसे। मोह में आसक्ति हो जाती है। फिर वह हमारे आसपास नहीं रहता, दूर जाता है, तो हम उसे याद करते हैं। आसक्ति हो जाती है, बंधन हो जाता है। लोभ हमें किस स्थिति में होता है, यह देखना है। मेरे पास जितना था, मैं खुश था। लेकिन जैसे ही मैंने अपने सामने वाले के पास कुछ देखा, जो मेरे पास नहीं था, लोभ हो गया कि मेरे पास भी होना चाहिए। उसमें साथ-साथ मत्सर भी जुड़ा होता है, ईर्ष्या। उसमें सब हो जाता है। तो जब भी ऐसा हो, हमें समझना है कि मेरे जीवन में इसकी जरूरत है क्या, और क्या मैं इस लायक हूं। जब भी आप कुछ देखो, और लोभ हो कि मेरे पास भी होना चाहिए, तो देख लो कि आप उस लायक हो क्या। जैसे ही आप अपने आप को देखोगे, आपका लोभ हट जाएगा। और अपनी जरूरत के अंदर रहो। जरूरत से ज्यादा चाहेंगे, तभी उस अतिरिक्त पैसे की जरूरत पड़ेगी। अगर हम अपनी जरूरत में जी रहे हैं, तो किसी के करोड़ों-अरबों में खेलने से हमें क्या लेना-देना। हमारी जरूरत पूरी हो रही है। बस, बात खत्म।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12