प्रश्नोत्तर P8-0013 · भाग 8
एक श्रोता लिखता है कि चेतना, जिसके द्वारा हम जागृत अवस्था का अनुभव करते हैं, वह भी मृत्यु के बाद चली जाती है, इसलिए वह भी अस्थायी हुई, असत्य हुई। इस प्रकार सत्य अव्यक्त हुआ। गुरु जी, इस पर क्या कहना है? और अगर आज तक जो किया वह गलत था, तो आगे रहना मुश्किल हो जाएगा?
सत्य व्यक्त नहीं किया जा सकता। लेकिन सत्य तक पहुंचने के लिए व्यक्त किया जा सकता है। तो शरीर छूटने के बाद अगर आप अपने आप में स्थित, स्थिर हो, और कोई उम्मीद नहीं है, तो आप सत्य के साथ चले गए। क्या? क्योंकि कुछ चाहिए ही नहीं। छूटा कुछ नहीं। तो आप गए तो सत्य के साथ होकर चल दिए।
अपने चक्कर में पड़ो। अपने चक्कर में पड़ो मतलब अपना आत्मिक कल्याण करो, अपने कर्म को करते हुए।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 19 अप्रैल 2026, इस वक्त इस दुनिया में सबसे कठिन कार्य क्या है ? #योगी · 2026-04-19