प्रश्नोत्तर P8-0080 · भाग 8
रामायण में कहते हैं कि रावण, कुंभकर्ण और विभीषण ने तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया। तब माता सरस्वती कुंभकर्ण की जीभ पर बैठकर इंद्रासन के बदले निद्रासन मंगवाती हैं। क्या यह कुंभकर्ण के साथ छल नहीं था? कृपया मार्गदर्शन करें।
वो देवता थे। देवता आपकी इच्छा ही पूछेगा। और कुंभकर्ण भी तो अधर्म का साथ दे रहा था। एक अधर्मी को मारने के लिए अधर्म का सहारा लेना पड़ेगा। अगर कोई तलवार से व्यवहार कर रहा है और तुम फूल लेकर खड़े हो जाओ, तो मारे जाओगे। अगर कोई समाज को प्रताड़ित कर रहा है, समाज में बुरा व्यवहार कर रहा है, समाज के लोगों को सता रहा है, तो उसको अधर्म से ही मारा जाएगा। धर्म खत्म हो गया। धर्म उसके साथ किया जाता है जो धार्मिक हो, धर्म पर चले। और अब सामने वाले ने अधर्म कर दिया, तो धर्म अब रहा कहां। उसको मारने के लिए अधर्म का ही सहारा लेना पड़ेगा।
अगर आप कहो कि एक बेईमान है, और हम समझ गए कि वह बेईमान है और वह गलत करने जा रहा है, तो अब हम उसे रोकने के लिए अगर गलत भी कर रहे हैं तो वह सही है, क्योंकि वह तो गलत ही कर रहा है। अब उसके साथ सही व्यवहार थोड़ी किया जा सकता है। समझने का प्रयास करिए। इस समाज में कुछ काम करना है तो आपको बहुत कुछ करना पड़ेगा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26