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प्रश्नोत्तर P9-0009 · भाग 9

कल आपने कहा कि आपको कभी खुद में कमी महसूस नहीं हुई। लेकिन अगर कमी नहीं थी, तो कुछ चाहिए का भाव क्यों था, जिसके कारण किसी की गाली महीनों तक पीड़ा देती रही?

कमी का मतलब यह नहीं था कि अंदर कोई बेईमानी की कमी थी, कि मैं किसी बेईमानी में फंसा था, या मैं विकारों में लिप्त था। कमी तो इतनी थी ही कि अपनी उपलब्धि नहीं थी। लेकिन मैं विकारों में नहीं फंसा हुआ था। ऐसी कोई आदत नहीं थी जिसकी वजह से मैं परेशान था, ऐसा लगे कि मैं गलत कर रहा हूं। ऐसी हमारी कोई आदतें नहीं थीं। तो यह तो कमी थी ही कि मेरी उपलब्धि नहीं हुई थी, और मैं समाज के लिए कुछ करना चाहता था। यह दोनों बात थी। कमी का मतलब मैंने यह कहा कि मेरी ऐसी कोई आदत नहीं थी जो मेरे आत्मिक कल्याण में बाधा बन सकती थी। ऐसी कोई आदत नहीं थी मेरी। ऐसा कुछ मुझे छोड़ना नहीं था। चाहे वह मोह की बात हो, चाहे लालच की बात हो। ऐसा कुछ नहीं था मेरे अंदर कि मुझे छोड़ने के लिए कहीं जाना पड़ा। मैं अगर निकला, तो कुछ खोज में निकला। कभी भगवान की खोज में, कभी परमात्मा की खोज में, कभी आत्मज्ञान की खोज में, कभी लोगों के आत्मिक कल्याण के लिए, कि मुझे मार्ग मिल जाए, कि मैं लोगों को रास्ता बता पाऊं। उसकी खोज में तो खोज तो थी ही। खोज कोई कमी नहीं होती है। आप यह मत समझिए कि खोज कोई कमी होती है। अगर कोई व्यक्ति खोज कर रहा है, एक वैज्ञानिक खोज करता है, तो आप यह मत समझिए कि उसके जीवन में उसकी कोई कमी है। उसने देखा कि नहीं, मुझे तो जीवन में कुछ करना ही है। तो मैंने समाज में यह कमी देखी कि लोगों को जरूरत है, और समाज को जरूरत है। मैं करने के लायक हूं, तो क्यों न मैं इनके लिए कर दूं। तो ऐसा नहीं कि कोई व्यक्ति खोज रहा है, तो उसके अंदर कोई कमी ही है। ऐसा नहीं है। व्यक्ति कभी अपनी जरूरत के लिए खोजता है, तो कभी लोगों की जरूरत उसे दिखती है, उसके लिए खोजता है। तो आप यह मत समझिए कि किसी कमी की वजह से ही आदमी चलता है, कि व्यक्तिगत उसकी कोई कमी है। नहीं, सामर्थ्यवान व्यक्ति भी खोज करता है, लोगों के लिए।

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वीडियो: Live के प्रश्न और उत्तर स्वयं के सामर्थ को जांच कर आगे बढ़े । #योगी · 2026-06-05