प्रश्नोत्तर P9-0024 · भाग 9
मेरी जरूरत में जीते हुए, दूसरों की जरूरत में जीना ही साधना है। क्या यही बात है?
देखिए, मेरी जरूरत की पूर्ति करते हुए, मेरे सामने कोई जरूरतमंद आता है, तो मैं उसके लिए क्या कर सकता हूं, मेरे सामर्थ्य के अनुसार, कि उसकी भी जरूरत पूरी हो जाए। यही साधना है। यही तपस्या है। और कभी न कभी आप योग्य बनकर वही काम करोगे।
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वीडियो: Live के प्रश्न और उत्तर स्वयं के सामर्थ को जांच कर आगे बढ़े । #योगी · 2026-06-05