प्रश्नोत्तर P9-0124 · भाग 9
मैं मैकेनिक का काम करता हूं। यह किसी के द्वारा सीखा है, और मैं भी किसी को सिखा रहा हूं। सीखना और सिखाना। मैं चाहता क्या हूं, यह पक्का कैसे करूं, और लक्ष्य तक कैसे पहुंचूं?
हमें अपने काम से मतलब। अपने आप से मतलब। आप लोग अपना ख्याल रखें। जहां भी हो, खुश रहें। अपने आनंद की स्थिति में होने के लिए काम करें। मेहनत करें। आगे बढ़ें। ईमानदारी से जीवन जिएं। सत्कर्म करें। जिससे आपका उद्धार हो जाए, वह करें। और आपको पता है, आपका उद्धार कैसे होगा। और अगर आपको कोई सहायता चाहिए, तो समाज में सहायता देने वाले लोग भी हैं।
जैसे आप क्या काम करते हो। मैकेनिक का काम करते। मैकेनिक ही बोलते हैं। तो वह किसी के द्वारा सीखे नहीं? किसी ने सिखाया न। और आप भी किसी को सिखा रहे हो। यही दुनिया है। सीखना और सिखाना। तुम देखो। तुम सीखने वाले हो, सिखाने वाले हो। चाहते क्या हो, यह पक्का कर लो। फिर आप वहीं चले जाओगे। बस क्या आपको चाहिए, बस वह पक्का कर लो। आपको वहां तक पहुंचाने वाले लोग मिल जाएंगे।
जैसे दो आदमी निकले। एक अपाहिज हो। और एक, अपाहिज के बाद कुछ भी न हो। वह है बस। और एक व्यक्ति एकदम। पैसे भी हैं। सब कुछ है। और दोनों कह रहे हैं कि मुझे वहां जाना है। और मैं जाके ही रहूंगा। आपको पता है, वह अपाहिज वाले को भी लोग पहुंचा देंगे। और वह भी पहुंच जाएगा। दोनों वहां पहुंच जाएंगे। जिसकी क्षमता है, वह भी पहुंच जाएगा। जिसकी क्षमता स्वयं की नहीं है, उसे कोई क्षमतावान आएगा, और उसे वहां तक पहुंचा देगा। कोई उसे वहां तक पहुंचाएगा। इतना पक्का है कि वह लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। अगर वह लक्ष्य को याद रखा है तो।
अगर वह लक्ष्य भूल गया, तो यहां से यहां गया। यहां से आके कहां गया। कहां बैठा है। लोग आकर पूछें, कहां जाना है। जाना तो है, लेकिन याद नहीं। समझ नहीं आ रहा, कहां जाऊं। तो वह व्यक्ति आपकी हेल्प नहीं कर सकता। आपकी इतनी हेल्प कर देगा, जितने में आप जी सको। वह भी एक वक्त, दो वक्त। बस। तो जीवन में लक्ष्य याद रखो। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। सिर्फ आप लक्ष्य याद रखो। आप सामर्थ्यवान हो या नहीं हो। दोनों स्थिति में आप लक्ष्य तक पहुंचना ही पहुंचना है। आपको पहुंचाने वाले लोग आपको मिल ही जाएंगे।
लेकिन अगर कोई कहे कि मैं पैरों से विकलांग नहीं हूं। मैं स्वस्थ हूं। और हमें कंधे पर दो किलोमीटर छोड़ दे। तो के, दो-चार पड़ाका मिले। क्या मिलेगा, कि नहीं। दो-चार थप्पड़। एक स्वस्थ आदमी अगर आपसे कहे कि मुझे कंधे पर बैठाओ, और दो किलोमीटर छोड़ दो, तो मेरे समझ से आप झापड़ ही मारो। न पहले बिठा लेंगे, फिर पटकेंगे। अरे हां, भाई। तरीका अलग होगा उसका। लेकिन अपाहिज आदमी हो, विकलांग हो, और कहे, भैया, मुझे वहां जाना है। आप कोई न कोई उसके लिए जुगाड़ करोगे। कोई न कोई व्यवस्था करोगे। समझ रहे हो।
आप लक्ष्य याद रखिए। सिर्फ लक्ष्य याद रखिए। और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पूरा भाव बनाइए। उसके लिए आपकी क्षमता के अनुसार काम करिए। आपको कोई न कोई व्यक्ति मिलेगा। और आपको वहां पहुंचा देगा। कहा गया न। जाने किस रूप में नारायण मिल जाए। तो वह लक्ष्य पर पहुंचाने वाला ही नारायण है। सामर्थ्यवान। नारायण का मतलब क्या। सामर्थ्यवान। जिसने आपको लक्ष्य तक पहुंचा दिया, वही तो सामर्थ्यवान होता है। आप तुलना में मत जाइए। आप देखिए कि मेरे लक्ष्य तक मुझे पहुंचा कौन रहा है। वही आपके लिए इस संसार में सामर्थ्यवान है। तो जाने किस भेष में नारायण मिल जाए। समझ गए हो, तो फिर ठीक हो, भैया।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06