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प्रश्नोत्तर P9-0186 · भाग 9

आपके व्यक्तित्व के बारे में मैं बोल नहीं सकती। विवेकानंद जी के व्यक्तित्व के लिए मेरे मन में बहुत प्रेम था। इतनी मुसीबतें, चौबीस-अट्ठाईस घंटे की यात्रा, एक सीट पर बैठे रहना, ये बातें लिखी कैसे जाएं? जो बाहर से देखेगा उसे लगेगा एयर कंडीशन कार से आराम से आ गए।

किसी के व्यक्तित्व के बारे में कोई बोल ही नहीं सकता। उसका काम बोलता है। आप कभी व्याख्या कर ही नहीं सकते। आप व्याख्या करोगे तो वह बस रत्ती मात्र होगा। क्योंकि किस देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में उसने काम किया है। आप कैसे लिखोगे। कैसे बताओगे। ये गए और आप आए, कैसे-कैसे मुसीबत से। मैं चौबीस घंटे के ऊपर लेटा भी नहीं। चौबीस घंटे हो गए। मैं तो बैठा ही रहा, गाड़ी की पीछे वाली सीट पर। जब गए तब गए थे। क्या यह लिखा जा सकता है? नहीं। ये सारी दिक्कतें लिख के थोड़ी जाएंगी। कैसे यह लिखा जाएगा। सत्ताईस-अट्ठाईस घंटा एक ही सीट पर बैठे रहना, कहीं एक बार भी लेटा नहीं। यह थोड़ा लिखा जाएगा। अब यहां से वहां तक पहुंचा, लोगों को लगेगा कार से आए। कितनी दिक्कत हुई, यह मुझसे पूछो। तुम्हें तो लगेगा, बढ़िया से एयर कंडीशन कार है, फर्स्ट क्लास आए। लेकिन कितनी दिक्कत का सामना करना पड़ता है सफर में। कार में सौ किलोमीटर गए, दो सौ आ गए, बहुत है। इसके आगे सफर किए तो हालत खराब होने लगती है। करने वालों को ही पता है। हर चीज नहीं लिखी जा सकती। सूक्ष्म हर चीज नहीं लिखी जा सकती।

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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16